पूर्वोत्तर में भाजपा को झटका: राष्ट्रीय सचिव हायथुंग बिल लोथा ने छोड़ा साथ, कहा- अल्पसंख्यकों-दलितों की आवाज़ नहीं सुनती मोदी सरकार
लोथा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पूर्वोत्तर के लोगों पर ध्यान नहीं देते हैं.
पूर्वोत्तर में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के राष्ट्रीय सचिव हायथुंग बिल लोथा ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 के विरोध में उन्होंने यह कदम उठाया है. उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार में अल्पसंख्यकों, दलितों और पिछड़ी जाति के लोगों की बात नहीं सुनी जाती है.
प्रेस विज्ञप्ति में लोथा ने कहा है, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूर्वोत्तर के लोगों पर ध्यान नहीं देते हैं. उन्होंने असम और पूर्वोत्तर के स्थानीय को यातना और दु:ख दिया है. इसके साथ ही स्थानीय लोगों की पहचान, भाषा और संस्कृति के साथ भी खिलवाड़ किया गया है.”
नॉर्थ ईस्ट नाउ की ख़बर के अनुसार लोथा ने नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन को समर्थन भी दिया था. उन्होंने कहा था कि इस विधेयक के पास हो जाने के बाद त्रिपुरा की तरह पूर्वोत्तर के दूसरे हिस्से में भी बांग्लादेशियों का दबदबा बढ़ जाएगा, जिससे पूर्वोत्तर के स्थानीय पहचान के विलुप्त हो जाने का ख़तरा बना रहेगा. साथ ही उन्होंने कहा था कि इस बिल के लागू हो जाने के बाद असम के स्थानीय लोग अल्पसंख्यक बन जाएंगे.
लोथा ने पूर्वोत्तर के तमाम उन छात्र संगठनों की प्रशंसा की है, जो इस विधेयक के विरोध में मुखर होकर सामने आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि 2003 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (भाजपा की छात्र इकाई) की सदस्यता पाने के बाद से पार्टी ने जो भी जिम्मेदारी दी, उसे पूरा किया. लेकिन, अब भारतीय जनता पार्टी और नरेन्द्र मोदी सरकार की मंशा मेरे समझ से बाहर हो गई थी. अब मुझे भाजपा से पहले जितना लगाव नहीं रहा.
लोथा ने कहा कि मोदी सरकार में अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जनजाति, दलित और पिछड़ी जाति के नेताओं की आवाज़ नहीं सुनी जाती है और किसी भी नीतिगत फ़ैसले में उनकी आवाज़ नहीं सुनी जाती है. उन्होंने कहा कि इन्हीं कारणों को लेकर वे पार्टी से इस्तीफ़ा दे रहे हैं.