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राफ़ेल पर नया खुलासा: UPA सरकार से बेहतर नहीं है मोदी सरकार की डील, बेंचमार्क क़ीमतों में भी हुई है बढ़ोतरी

अंग्रेजी अख़बार ‘द हिन्दू’ के वरिष्ठ पत्रकार एन. राम ने यह खुलासा किया है

राफ़ेल घोटाले में एक के बाद एक नए खुलासे हो रहे हैं. ताजा खुलासे में यह बात सामने आई है कि मोदी सरकार द्वारा की गई राफ़ेल डील, कांग्रेस सरकार द्वारा की गई डील की तुलना में काफी कमज़ोर थी.

अंग्रेजी अख़बार ‘द हिन्दू’ के वरिष्ठ पत्रकार, एन. राम ने दावा किया है कि राफ़ेल डील के लिए बने सात सदस्यीय ‘भारतीय समझौता दल’ के तीन सदस्यों ने इस डील की प्रक्रिया से असहमति जताई थी. साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि तैयार हालत में 18 विमानों की डिलीवरी भी कांग्रेस सरकार द्वारा तय समय सीमा से ज्यादा धीमी है.

इससे साफ तौर पर देखा जा सकता है कि नरेन्द्र मोदी की सरकार ने अच्छी डील का जो दावा किया था, वो ग़लत साबित हुआ है. 

झूठा निकला मोदी सरकार का दावा

सुप्रीम कोर्ट के सामने सरकार ने कहा था कि उसने पिछली UPA सरकार से सस्ते कीमत पर यह डील की है. लेकिन, सरकार का यह दावा ग़लत साबित हुआ है. इसके साथ ही तीन अधिकारियों ने इस डील में संप्रभु या सरकारी गारंटी या बैंक गारंटी की जगह पर लेटर ऑफ कंफर्ट स्वीकार करने के फ़ैसले से भी आपत्ति जताई थी.

आपत्ति जताने वाले विशेषज्ञों में भारतीय लागत लेखा सेवा के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी एम. पी. सिंह, वित्तीय प्रबंधक (वायु सेना) ए.आर सुले और वायुसेना के संयुक्त सचिव और अधिग्रहण प्रबंधक राजीव वर्मा शामिल थे. इन्होंने 1 जून 2016 को अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी.

फ़्रांस के साथ होने वाली बातचीत पूरी होने के एक महीने बाद, और इस डील पर समझौता होने से तीन महीने पहले अधिकारियों ने 8 पन्नों की अपनी आपत्ति जाहिर की थी. इसमें अधिकारियों ने कहा था कि फ्रांस सरकार द्वारा जो दाम इस डील के लिए ऑफर किया गया है, वह वाज़िब नहीं है. साथ ही यह क़ीमत दोनों देशों के संयुक्त वक्तव्य से भी अलग है.

नियम और समय सीमा

10 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा के बाद सरकार ने कहा था कि चालू हालत में आने वाले 36 राफ़ेल विमान को वायुसेना की जरूरत के मुताबिक UPA सरकार की अपेक्षा जल्दी लाया जायेगा. लेकिन सच्चाई यह है कि पहले तैयार अवस्था में 18 विमानों की डिलीवरी 36 से 48 महीनों में की जानी थी, जिसे नई डील में बढ़ाकर 36 महीने से 53 महीने के बीच कर दिया गया. इनमें से जो राफ़ेल विमान भारत में आने थे, वो भी पूरी तरह तैयार अवस्था में नहीं लाए जाने वाले हैं.

क़ीमत

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली, रक्षा मामले की केन्द्रीय कैबिनेट ने कहा था कि उसने UPA सरकार वाली डील से कम बेंचमार्क क़ीमत पर सौदा किया है. लेकिन, ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बेंचमार्क कीमत भी यूपीए सरकार की तुलना में 55.6 प्रतिशत अधिक रखी गई है.

बता दें कि ‘द हिन्दू’ ने राफ़ेल घोटाले से जुड़े कई खुलासे किए हैं. हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया था कि प्रधानमंत्री कार्यालय रक्षा मंत्रालय के समानांतर राफ़ेल सौदे पर बातचीत कर रहा था.

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