उबर के ड्राइवर विपिन ने खोली PM मोदी के दावे की पोल, सरकार की योजना नहीं बल्कि लाखों रुपये ख़र्च करने पर मिला रोज़गार
NSSO के आंकड़ों में बीते साल, भारत की बेरोजगारी 6.1% आंकी गई है.
सरकार की ओर से 2017-18 के NSSO के बेरोज़गारी के आंकड़ों को दबाने पर उठे विवाद के बाद नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने दावा किया था कि सरकार ने ‘ओला’ और ‘उबर’ जैसी कंपनियों में लाखों लोगों को रोज़गार दिया है. इन दावों को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने दिल्ली के एक उबर कैब ड्राइवर ‘विपिन’ से बातें की हैं.
ग़ौरतलब है कि NSSO के आंकड़ों में बीते साल, कथित तौर पर भारत की बेरोज़गारी 6.1% आंकी गई है.
प्र.1- आप कितने सालों से टैक्सी चला रहे हैं ?
उ.- मेरे पास एक मारुति सुजुकी ‘वैगन आर’ है. मैं इसे लगभग दो सालों से उबर के लिए टैक्सी के रूप में चला रहा हूं. मैं सुबह 8 बजे घर से निकलता हूं और रात 11 बजे वापिस लौटता हूं.
प्र.2- क्या ये आपकी पहली नौकरी है ?
उ.- नहीं, इससे पहले मैंने एक कंपनी में काम किया है जो ‘कैफे कॉफी डे’ को ज़रूरी चीज़ों की सप्लाई करती थी. मैंने वहां पांच साल काम किया था. पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर में अपने घर के पास के एक स्कूल से दसवीं कक्षा पास करने के ठीक बाद मैं उस कंपनी में शामिल हो गया था. ओपन स्कूलिंग के ज़रिए बाद में मैंने बारहवीं की परीक्षा भी दी थी, मगर इसे पास करने में असफल रहा. बाद में, कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि मैं एक ड्राइवर बन जाऊं. उन्होंने कहा था की इस काम में अच्छे पैसे हैं….
प्र.3- आप कितना कमा लेते हैं ?
उ.- एक पैसेंजर से जितनी आमदनी होती है, ओला / उबर कमीशन के रूप में उसमे से अपना 26 फ़ीसदी काट लेते हैं. उसके बाद दिन भर में किसी तरह 1,500 रुपये हाथ में बचते हैं, जिसमें से कम से कम 500 रुपये तो ईंधन पर ही खर्च हो जाते हैं. एक दिन में लगभग 900-1,000 रुपये ही पूरी तरह से कमा पाता हूं. इस पैसे से मुझे अपनी कार और परिवार दोनों की ही देखभाल करनी रहती है. कार खरीदने को मैंने लोन लिया था जिसकी हर महीने 12,500 रुपए EMI चुकानी रहती है. पहले ओला और उबर कई तरह के इन्सेंटिव भी देता था, मगर 2015 के बाद से वो सब भी बंद कर दिए गए.
प्र.4- क्या इसे एक मुश्किल नौकरी कहेंगे ?
उ- कभी-कभी पैसेंजर गलत बर्ताव करते हैं. जब कोई यात्री बुकिंग रद्द करता है तो उनके बिल में जुर्माना लगाया जाता है. इसे लेकर वे झगड़ने लगते हैं. कुछ ऐसे भी यात्री होते हैं जो इंधन का पैसा दिए बिना निकल जाते हैं. ओला और उबर के साथ काम करने वाले ड्राइवरों का ज़्यादातर प्रशिक्षण ऐप के ज़रिए होता है. यात्रियों से बातचीत करते समय मैं सिखाई गई बातों का इस्तेमाल करता हूं.
प्र.5- नीति आयोग का कहना है कि ओला और उबर ने 2 मिलियन नौकरियां दी हैं लोगों को….
उ.- सरकार ने हमें कोई नौकरी नहीं दी है. मैंने अपने 5-6 लाख रुपये कार खरीदने के लिए लगाए तब जा के एक नौकरी पाई है. मुझे कहीं CV भेजकर, यह नौकरी मुफ्त में नहीं मिली है. 12 घंटे से ज्यादा हमें काम करना पड़ता है.