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सामने आया राफ़ेल घोटाले का नया दस्तावेज़, रक्षा मंत्रालय ने PMO के हस्तक्षेप को बताया था नुक़सानदेह

राफ़ेल घोटाले में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं और मोदी सरकार विपक्ष से पूरी तरह घिरी हुई नज़र आ रही है.

राफ़ेल घोटाले में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं और मोदी सरकार विपक्ष से पूरी तरह घिरी हुई नज़र आ रही है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने शनिवार (9 फरवरी) को इस सौदे से जुड़ा रक्षा मंत्रालय का एक और नोट जारी किया है. इसमें कहा गया है कि राफ़ेल सौदे में प्रधानमंत्री कार्यालय और फ्रांस की टीम के बीच समानांतर समझौता करने से भारतीय पक्ष के हितों को नुक़सान पहुंचा सकता है.

बता दें कि शुक्रवार को द हिन्दू में रक्षा मंत्रालय की एक नोट के सार्वजनिक हो जाने के बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने उस नोट में मनोहर पर्रिकर के जवाब को ढाल बनाकर सरकार का बचाव किया था. द हिन्दू की रिपोर्ट में कहा गया था कि रक्षा मंत्रालय के समानांतर प्रधानमंत्री कार्यालय भी फ्रांस सरकार से समझौता कर रहा था. रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने इसे लेकर आपत्ति जताई थी.

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने जो नोट शेयर किया है, उसमें लिखा है, “रक्षा मंत्रालय द्वारा गठित भारतीय समझौता दल (INT) के समानांतर प्रधानमंत्री के संयुक्त सचिव और फ्रांस के रक्षा मंत्री के सलाहकार के बीच चल रही बातचीत इस डील को प्रभावित कर रही है. इस तरह की समानांतर बातचीत का लाभ उठाकर फ्रांस हमें नुक़सान पहुंचा सकता है.”

बता दें कि 8 फरवरी को प्रकाशित अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में द हिन्दू के वरिष्ठ पत्रकार एन. राम ने रक्षा मंत्रालय की एक चिट्ठी छाप दी थी, जिसके बाद राफ़ेल घोटाले के विवाद ने नया रूप अख्तियार कर लिया है. कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के नेता कह रहे हैं कि अब प्रधानमंत्री कार्यालय सहित प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका इस घोटाले में स्पष्ट हो गई है.

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