May a good source be with you.

राफ़ेल डील के दौरान पीएमओ की दखलंदाज़ी का विरोध किया था रक्षा मंत्रालय ने

पीएमओ की वजह से फ्रांस सरकार ने सौदे में बैंक गारंटी का प्रावधान शामिल नहीं किया, जो कि भारतीय वार्ता टीम की बात के बिलकुल उलट था

अंग्रेज़ी अख़बार ‘द हिन्दू‘  की एक रिपोर्ट में एक नोट का खुलासा किया गया है, जो रक्षा मंत्रालय द्वारा परिकर को लिखा गया है. नोट के मुताबिक राफ़ेल डील के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय के दखल करने से फ्रांस को फायदा पहुंचा. 7.87 बिलियन डॉलर की विवादित राफे़ल डील पर दोनों देशों के बीच हो रही बातचीत के दौरान पीएमओ की ओर से किये जा रहे समानांतर दखल का भारतीय रक्षा मंत्रालय ने जमकर विरोध किया था.

रक्षा मंत्रालय का कहना था कि पीएमओ की ओर से इस तरह की समानांतर बातचीत की वजह से रक्षा मंत्रालय की टीम और समझौता ज्ञापन, कमज़ोर हुए हैं. 24 नवंबर, 2015 को इस मामले को तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर परिकर के सामने भी लाया गया था.

तत्कालीन रक्षा सचिव जी.मोहन कुमार ने आधिकारिक तौर पर रक्षा मंत्री परिकर को ध्यान दिलाते हुए लिखा था कि पीएमओ को इस तरह की बातचीत से बचना चाहिए क्योंकि इससे रक्षा मंत्रालय की बातचीत प्रभावित हो रही है.

बताते चले कि फ़्रांसिसी समझौते की टीम के प्रमुख जनरल स्टीफ़न रेब ने रक्षा मंत्रालय को एक पत्र लिखा था, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के संयुक्त सचिव जावेद अशरफ और फ्रांसिसी रक्षा मंत्री के राजनयिक सलाहकार लुइस वेसी के बीच 20 अक्टूबर 2015 को टेलीफोन पर हुई बातचीत का उल्लेख था.

इस बातचीत के आधार पर  फ्रांस सरकार ने सौदे में बैंक गारंटी का प्रावधान शामिल नहीं किया, जो कि भारतीय वार्ता टीम की बात के बिलकुल उलट था.

मोदी सरकार की ओर से अक्टूबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि राफे़ल डील पर बातचीत के लिए केवल वायु सेना के उप प्रमुख की अध्यक्षता में बनाई गई सात सदस्यीय टीम ने ही समझौता ज्ञापन किया था, जिसमे पीएमओ की किसी भी भूमिका का कोई उल्लेख नहीं था.

इन सारे दस्तावेजों से साफ़ होता है कि मोदी सरकार की ओर से फ्रांस की सरकार के साथ सामानांतर बातचीत की गई थी और सुप्रीम कोर्ट से भी ये बात छिपाई गई.

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+