विश्वविद्यालयों में 200 प्वाइंट रोस्टर की मांग पर आज दिल्ली में प्रदर्शन, तेजस्वी बोले- आरक्षण विरोधी है मोदी सरकार
यूजीसी ने 5 मार्च 2018 को आदेश देते हुए कहा था कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में आरक्षित फैकल्टी पदों की गणना खाली पड़े कुल पदों के हिसाब से नहीं बल्कि विभाग के हिसाब से की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले को बरकरार रखते हुए अप्रैल 2017 के 200 प्वांइट रोस्टर को खत्म करने वाले निर्णय को सही ठहराया है. जिसमें विश्वविद्यालयों में फैकल्टी पदों के लिए आरक्षण की गणना विभाग के हिसाब से करने की बात कही गई थी.
सबरंग की ख़बर के मुताबिक यूजीसी ने 5 मार्च 2018 को आदेश देते हुए कहा था कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में आरक्षित फैकल्टी पदों की गणना खाली पड़े कुल पदों के हिसाब से नहीं बल्कि विभाग के हिसाब से की जाएगी.
इस फ़ैसले पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अप्रैल 2018 को याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है.
ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार ने कहा था कि विभाग के आधार पर आरक्षण की गणना करने से आरक्षित कैटेगरी के लिए सीटें कम हो जाएंगी, जिससे आरक्षण व्यवस्था को लागू करने का उद्देश्य पीछे रह जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद 200 अंक रोस्टर पर अध्यादेश लाने और 13 प्वाइंट रोस्टर को वापस लेने के लिए आज दिल्ली में विरोध मार्च निकाला जाएगा. इसका विरोध करने वाले छात्र-शिक्षक संगठनों का कहना है कि 13 प्वाइंट रोस्टर को बरकरार रखने के फ़ैसले से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एसटी, एससी और ओबीसी शिक्षकों की संख्या में कमी आ जाएगी.
अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ (AIPWA) की सचिव कविता कृष्णन ने ट्विट कर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने फैकल्टी पदों के लिए एससी एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षित पदों पर नियुक्ति के लिए 13 प्वाइंट रोस्टर को बरकरार रखने का फ़ैसला लिया है. सरकार फैकल्टी पदों में आरक्षण के उचित कार्यान्वयन के लिए तुरंत 200 अंक के रोस्टर को बहाल करने के लिए आध्यदेश लाए.
SC verdict upholding 13 point roster for appointments in faculty positions will lead to slashing of SC ST OBC reserved positions. @PMOIndia – immediately bring ordnance, enact law to restore 200 point roster for proper implementation of reservations in faculty positions. pic.twitter.com/5x6WopbsSx
— Kavita Krishnan (@kavita_krishnan) January 24, 2019
इस पूरे मामले में राजद नेता तेजस्वी यादव ने मोदी सरकार पर तंज कसा है. अपने ट्वीट में तेजस्वी ने लिखा कि लंबे संघर्ष के बाद उच्च शिक्षा में हासिल संवैधानिक आरक्षण को मनुवादी मोदी सरकार ने लगभग खत्म कर दिया है. 200 प्वाइंट रोस्टर के लिए सरकार द्वारा दायर कमज़ोर SLP को सुप्रीम कोर्ट में खारिज कर दिया गया है. अब विभागवार आरक्षण यानी 13 प्वाइंट रोस्टर लागू होगा. मनुवाद मुर्दाबाद.
लंबे संघर्ष के बाद उच्च शिक्षा में हासिल संवैधानिक आरक्षण को मनुवादी मोदी सरकार ने लगभग खत्म कर दिया गया है। 200 प्वाइंट रोस्टर के लिए सरकार द्वारा दायर कमज़ोर SLP को सुप्रीम कोर्ट में खारिज कर दिया गया है। अब विभागवार आरक्षण यानी 13 प्वाइंट रोस्टर लागू होगा। मनुवाद मुर्दाबाद!
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) January 23, 2019
एक अन्य ट्वीट में तेजस्वी ने लिखा, “SC/ST एक्ट की तरह यहां भी सरकार ने धोखा दिया. HRD मंत्री अध्यादेश लाने की बात कर पलट चुके हैं. सवर्ण आरक्षण चंद घंटों में लाने वाले बहुजनों के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं. उच्च शिक्षा के दरवाजे अब बहुसंख्यक बहुजन आबादी के लिए बंद हो चुके हैं. विभागवार आरक्षण बंद कर पुराना नियम लागू करो.’
SC/ST एक्ट की तरह यहाँ भी सरकार ने धोखा दिया।HRD मंत्री अध्यादेश लाने की बात कर पलट चुके है।सवर्ण आरक्षण चंद घंटों में लाने वाले बहुजनों के साथ धोखाधड़ी कर रहे है। उच्च शिक्षा के दरवाजे अब बहुसंख्यक बहुजन आबादी के लिए बंद हो चुके हैं। विभागवार आरक्षण बंद कर पुराना नियम लागू करो।
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) January 23, 2019