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राफ़ेल विवादः एन राम ने राफ़ेल सौदे को लेकर मोदी सरकार को घेरा (देखें विडियो)

द हिंदू के पूर्व संपादक ने कहा, ” मोदी सरकार इस बात पर पर्दा डाल रही है कि उसने 126 विमानों के जगह केवल 36 विमान के ही सौदे किए.

राफ़ेल सौदे को लेकर द हिंदू के पूर्व संपादक एन राम ने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि इस मसले पर केंद्र सरकार जनता को गुमराह कर रही है. वो इस बात पर पर्दा डाल रही है कि उसने 126 विमानों के जगह केवल 36 विमान के ही सौदे किए. यह सौदा मोदी सरकार की तरफ से फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट के लिए बड़ा तोहफा था.

राफ़ेल सौदे को लेकर एशियाविले समाचार से खास बातचीत एम राम ने कहा कि 126 राफ़ेल विमानों की खरीद को लेकर एचएएल को सौदा दिया जाना था. लेकिन अचानक अप्रैल 2016 में नई डील सामने आई. जब प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के गए और अचानक 36 राफ़ेल विमानों की खरीद की ऐलान किया गया. इस सौदे से हर विमान की क़ीमत 41.42 प्रतिशत तक बढ़ गई.

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उन्होंने कहा कि वायुसेना को 126 विमानों की ज़रूरत थी. लेकिन सरकार ने केवल 36 विमानों का सौदा किया. अगर आप एक साधारण सी गिनती भी करेंगे तो पता चलेगा कि सरकार ने 1.3 बिलियन यूरो की भारी लागत से 126 के बजाय 36 विमान पर मुहर लगाई गई थी. जिसकी वजह से प्रति विमान की कीमत 3 गुना बढ़ गई है.

एन राम ने कहा कि बोफोर्स और राफ़ेल दोनों मामलों का फ़ैसला मनमाना था. उन्होंने कहा, “इस (राफ़ेल) मामले में पेशेवरों को नज़रअंदाज किया गया या फैसला उन पर हावी रहा.”

पूर्व संपादक ने आगे कहा कि राफ़ेल सौद में भारत की इंडियन नेगोशिएशन की 7 सदस्यओं की टीम में से 3 वरिष्ठ अधिकारियों ने समझौते पर एतराज़ जताया था.

उन्होंने कहा कि राफ़ेल सौदे में भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगया था और प्रशांत भूषण, अरूण सौरी, यशवंत सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. लिहाजा यह जांच जारी रहेगी.

एम राम ने आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार ने यूरोफाइटर लुभावने ऑफर को भी नज़रअंदाज कर दिया. उन्होंने कहा कि भारत सरकार के पास राफ़ेल विमान की क़ीमतों को लेकर सौदेबाज़ी करने के कई मौके थे. लेकिन उनका इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया. 4 जुलाई 2014 को यूरोफाइटर के शीर्ष अधिकारी ने रक्षा मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर कहा कि बेहतर क्षमता से लैस 126 यूरोफाइटर को पहले से 20 प्रतिशत कम दाम पर दे सकता हूं. तब कमेटी ने यूरोफाइटर के प्रस्ताव को यह कह कर ठुकरा दिया कि यूरोफाइटर ने बिना मांगे प्रस्ताव दिया है. इस समय यह टेंडर बंद हो चुका है और नियमों के हिसाब इस पर विचार नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि कमेटी का यह फैसला सही था या नहीं, इस पर बहस हो सकती है.

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