अंधकार भरे इस समय में देश के कलाकर निभा सकते हैं महत्वपूर्ण किरदार : नंदिता दास, देखें विडियो
कारवां-ए-मोहब्बत से बातचीत के दौरान नंदिता दास ने ये बातें कही.
फिल्म निर्देशक नंदिता दास का कहना है कि ये समय चुप रहने का नहीं बल्कि बोलने का समय है. हम जो सोचते हैं उसे पूरे विश्वास के साथ कहना चाहिए.
कारवां-ए-मोहब्बत से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं एक 8 साल के बच्चे की मां हूं और मुझे महसूस होता है कि ये दुनिया वो नहीं है जहां मैं उसे अकेले छोड़ दूं, यहां सिर्फ मेरे ही नहीं बल्कि किसी भी बच्चे को अकेले नहीं छोड़ा सकता.”
उन्होंने कहा कि एक आर्टिस्ट अपनी कविता के रूप में, पेंटिंग के रूप में, फिल्म के रूप में इस अंधेरे को बयान करते हैं, खासतौर पर जबकि देश में चारों तरफ क्राइम, बंटवारा, डर और झूठ जैसा अंधेरा छाया हुआ है, कलाकार के लिए इस तरह की सेंसटिविटी को सबके सामने लाना एक अहम कदम है.
मंटो के बारे में उन्होंने कहा कि मंटो कोई नाम नहीं है, कहानीकार नहीं है, मंटो एक सोच है, सच है, एक बहादुरी है, जो सच और ईमानदार है.