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भाजपा नेता की धमकी से डरे वीसी, असम विश्वविद्यालय में छात्रों के प्रदर्शन पर रोक

असम विश्वविद्यालय के छात्र नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं.

देश और राज्य के विश्वविद्यालयों में भाजपा किस प्रकार कब्जा जमाई हुई है, असम का ताज़ा मामला इसकी पुष्टि करता है. असम विश्वविद्यालय में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर भाजपा नेता प्रदीप दत्ता रॉय की धमकी बाद संस्थान के कुलसचिव ने विश्वविद्यालय से बिना इज़ाज़त लिए प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी है.

असम विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. संजीव भट्टाचार्य ने आदेश में कहा कि अधिकारियों की पूर्व इज़ाज़त के बिना कैम्पस में कोई जुलूस या धरना और किसी तरह का जमावड़ा नहीं होगा और अगले आदेश तक इस तरह की गतिविधियों पर सख़्त पाबंदी है. भाजपा नेता प्रदीप दत्ता राय ने स्थानीय समाचार चैनल में कहा था कि मैं विश्वविद्यालय के असमिया भाषी छात्रों को चेतावनी देता हूं कि वे पढ़ने आए हैं इसलिए राजनीति में शामिल न हों.

इंसाइड-एनर्ड की ख़बर के मुताबिक रॉय ने कहा कि कुछ खिलोंजिया (मूल निवासी) छात्र असम विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं. जिसकी आलोचना की जानी चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि जो छात्र विधेयक का विरोध कर रहे हैं उन पर कार्रवाई करने के लिए मैं कुलपति से मिला हूं. मैंने असमी छात्रों को चेतावनी दी है कि आप लोग यहां पढ़ाई करने आए हैं तो वही करें, राजनीति में शामिल होने की ज़रूरत नहीं है, वरना मुझे विश्वविद्यालय में उनके प्रवेश पर रोक लगाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.

बता दें कि भाजपा नेता के बयान की कड़ी आलोचना की जा रही है. गुवाहाटी के कॉटन यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स यूनियन ने सांप्रदायिकता उकसाने वाला बयान देने पर रॉय के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाई है. राज्य में विधेयक का विरोध करते हुए छात्रों ने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का पुतला भी जलाया.

ज्ञात हो कि यह विधेयक 31 दिसंबर 2014 से पहले बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने को लेकर है. जिसे लेकर असम में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है.

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