नोटबंदी का ज़ख़्मः बैंक की लाइन में खड़े रहने के दौरान हार्ट अटैक से हुई पति की मौत, पत्नी को नहीं मिलती विधवा पेंशन
नोटबंदी के दौरान नूरजहां की बेटियों की शादी होनी थी. नोट बदलने के लिए पति 1 महीने तक बैंको के चक्कर लगाते रहे.
मोदी सरकार भले ही नोटबंदी के फ़ैसले पर जनता को फायदे गिनवाती रही हो लेकिन देश में कुछ ऐसो परिवार मौजूद हैं जिन्हें ज़िंदगी भर नोटबंदी का दर्द महसूस होत रहेगा.
एनडीटीवी की ख़बर के अनुसार उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में रहने वाली नूरजहां के पति ज़फ़रुद्दीन की मौत नोटबंदी के दौरान लाइनों में लगने से हो गई थी. उस समय नूरजहां की 2 बेटियों की शादी होने वाली थी. लेकिन अचानक आए नोटबंदी के फ़ैसले ने उनकी जिंदगी बदल दी.
नोट बदलने के लिए नूरजहां के पति बैंक की लाइनों में खड़े रहते थे. इसी दौरान हार्ट अटैक की वजह से उनकी मौत हो गई. नोटबंदी का दर्द बयां करते हुए नूरजहां रो पड़ी.
पति की मौत के बाद नूरजहां को सरकार की तरफ से मदद के नाम पर सिर्फ 30 हजार रुपए मिले थे. नूरजहां को आज तक विधवा पेंशन नहीं मिली है. घर खर्च चलाने और दो वक्त की रोटी कमाने के लिए वह दूसरों के खेतों में मजदूरी करती हैं.
नूरजहां एक छोटे से कमरे में रहने को मजबूर है जहां बिजली और शौचालय की कोई सुविधा नहीं हैं. लेकिन बावजूद इसके मोदी सरकार नोटबंदी की सराहना करने से नहीं चूकती है.