सीवीसी जांच की निगरानी करने वाले पूर्व जज ने कहा- आलोक वर्मा के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं, जल्दबाज़ी में लिया फ़ैसला
जस्टिस एके पटनायक ने कहा कि सीवीसी रिपोर्ट के जांच परिणाम (निष्कर्ष) मेरा नहीं है.
CBI निदेशक के पद से आलोक वर्मा को हटाने को लेकर रिटायर्ड जस्टिस ए.के पटनायक ने केंद्र सरकार और सीवीसी की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि आलोक वर्मा के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं था और सीवीसी ने जो कुछ कहा वह अंतिम शब्द नहीं हो सकते हैं.
दरअसल बीते गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली चयन समिति ने बहुत जल्दबाज़ी में आलोक वर्मा को हटाने का फ़ैसला लिया था, जिसकी जस्टिस पटनायक ने कड़ी आलोचना की है. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार ए.के पटनायक ने कहा कि भ्रष्टाचार को लेकर आलोक वर्मा के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं था. पूरी जांच अस्थाना की शिकायत पर की गई थी. उन्होंने आगे कहा कि मैंने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सीवीसी की रिपोर्ट में कोई भी जांच परिणाम (निष्कर्ष) मेरा नहीं है.
ग़ौरतलब है कि ए.के पटनायक सुप्रीम कोर्ट में पूर्व जज रह चुके हैं और उन्हें एपेक्स कोर्ट ने सेंट्रल विजिलेंस कमिशन (सीवीसी) की निगरानी रखने के लिए कहा था. सीवीसी की रिपोर्ट के आधार पर आलोक वर्मा को CBI निदेशक के पद हटा दिया गया था.
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच को सौंप गई दो पेजों की रिपोर्ट में जस्टिस पटनायक ने कहा, “सीवीसी ने मुझे 9 नवंबर 2018 को राकेश अस्थाना द्वारा कथित रूप से हस्ताक्षरित एक बयान भेजा था. मैं स्षष्ट कर सकता हूं कि राकेश अस्थाना द्वारा साइन किया गया बयान मेरी मौजूदी में नहीं बनाया गया था.”
जस्टिस पटनायक ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई पॉवर कमेटी को फ़ैसला करना चाहिए. लेकिन यह फ़ैसला बहुत जल्दबाज़ी में लिया गया है. हम यहां एक संस्था के साथ काम कर रहे हैं. उन्हें अपना दिमाग लगाना चाहिए था. खासतौर पर सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर क्योंकि जो सीवीसी कहता है वह अंतिम शब्द नहीं हो सकते हैं.
ज्ञात हो कि सीवीसी ने बीते 10 सितंबर 2018 को राकेश अस्थाना की शिकायत पर 10 आरोपों की जांच शुरू की थी. जिसके बाद बीते गुरुवार को हाई लेवल समिति ने जल्दबाज़ी में आलोक वर्मा को CBI निदेशक के पद से हटाने का फ़ैसला लिया था.