अमित शाह के बेटे की कंपनी को मिल रही है कारपोरेट मंत्रालय की शह, दो सालों से लेखा-जोखा न देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
जय शाह की कंपनी कुसुम फिनसर्व एलएलपी ने पिछले दो वित्त वर्षों का 2016-17 और 2017-18 का लेखा विवरण मंत्रालय में जमा नहीं कराया है.
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह पर वित्त लेखा विवरण जमा न करने पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. जय शाह की कंपनी कुसुम फिनसर्व एलएलपी ने पिछले दो वित्त वर्षों का 2016-17 और 2017-18 का लेखा विवरण मंत्रालय में जमा नहीं कराया है. जबकि आपको बता दें कि कारपोरेट मंत्रालय उन कंपनियों और सीमित देयता भागीदारियों (एलएलपी) के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहा है जिन्होंने लगातार दो सालों तक या उससे अधिक समय का वार्षिक लेखा विवरण जमा नहीं कराया है.
न्यूज़ वेबसाइट कारवां के मुताबिक़, बीजेपी ने एक तरफ़ तो लेखा विवरण जमा न करने वाली कंपनियों के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल रखा है, लेकिन अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी सरकार के निर्देशों का उल्लंघन कर रही है.
गौरतलब है कि लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप अधिनियम, 2008 के तहत प्रत्येक एलएलपी को 30 अक्टूबर तक अपना लेखा विवरण जमा कराना होता है. यदि कंपनी ऐसा नहीं कर पाती है तो उस पर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाता है. बावजूद इसके जय शाह की कंपनी ने लगातार दो सालों का लेखा विवरण जमा नहीं किया है.
कारवां में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल अगस्त में कुसुम फिनसर्व ने जो लेखा विवरण जमा किया है उससे ज्ञात होता है कि शाह की कंपनी ने 2016 तक एक निजी बैंक, एक सहकारी बैंक और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से 97 करोड़ 35 लाख रुपए का कर्ज लिया है. इसमें से 25 करोड़ रुपए का कर्ज पिता अमित शाह की अहमदाबाद की दो संपत्तियों को गिरवी रख कर लिया गया है.
वहीं इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने से पहले कुसुम फिनसर्व को दी गई कर्ज की राशी 300 % बढ़ गई थी लेकिन ताजा बैलेंसशीट में कंपनी की नेट वर्थ मात्र 5 करोड़ 83 लाख रुपए दिखाई गई है. वहीं कंपनी ने 2016-17 का वार्षिक रिटर्न जमा किया है लेकिन अपने कामकाज का वित्तीय लेखाजोखा जमा नहीं किया. कंपनी के ताजा वित्त विवरण से उसकी सटीक माली हालत और उसे प्राप्त कर्ज में हुई बढोतरी का पता चल सकता है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि जय शाह की कंपनी पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है.