इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी करने वाले छात्रों में बढ़ा खुदकुशी का मामला, राहुल बोले- हार मत मानें, कोई भी असफलता स्थायी नहीं होती
साल 2018 में 19 छात्रों ने आत्महत्या की थी.
राजस्थान के कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं सामने आ रही हैं. बीते दिसंबर में चार छात्रों के आत्महत्या की ख़बर सामने आई थी. पुलिस ने बताया कि कोटा में कोचिंग कर रहे छात्रों की आत्महत्या में बढ़ोतरी हुई है. साल 2018 में 19 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं.
दरअसल, इंजीनियरिंग और मेडिकल में कॉलेजों में दाखिला लेने के लिए छात्र कोटा के कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई करने के लिए जाते हैं. पढ़ाई के तनाव और परीक्षा में सफलता प्राप्त न होने की स्थिति में छात्र आत्महत्या का रास्ता अपना लेते हैं.
द प्रिंट की ख़बर के अनुसार कोटा पुलिस के मुताबिक साल 2015 में 31, 2016 में 18, 2017 में 7 और साल 2018 में 19 छात्रों ने ख़ुदकुशी की थी. पुलिस के मुताबिक 2013 के बाद शहर में आत्महत्या की घटनाओं में 61.3 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है.
आत्महत्या करने वाले छात्रों ने अपने सुसाइड नोट में कोचिंग संस्थानों को बंद करने की बात कही क्योंकि कोचिंग संस्थानों में बच्चों पर पढ़ाई को लेकर तनाव बनाया जाता है. दो साल पहले आत्महत्या करने वाली छात्रा कीर्ति त्रिपाठी ने अपने सुसाइड नोट में इस बात का खुलासा किया था.
छात्रों के ख़ुदकुशी के बढ़ते मामले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चिंता व्यक्त की है. फ़ेसबुक पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा, “मैं छात्रों से कहना चाहता हूं कि कोई भी असफलता स्थायी नहीं होती है. आप हार न मानें. हमें आप सभी पर नाज है. आप मेहनत करें और हौसला रखें, किसी न किसी रूप में कामयाबी आपके कदम जरूर चूमेगी. छात्रों के माता-पिता से मेरी प्रार्थना है कि बच्चे बहुत मेहनत करते हैं, उन पर जितना कम दबाव हो उतना बेहतर है. मैं सभी छात्रों की कामयाबी की कामना करता हूं.”