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बिहार में यह कैसा सुशासन? बंद होने के कग़ार पर हैं 1140 से ज़्यादा सरकारी स्कूल

शिक्षा की गुणवत्ता में कमी और आधारभूत संरचनाओं की बदतर स्थिति के कारण मां-बाप अपने बच्चों का दाखिला प्राइवेट स्कूलों में करा रहे हैं.

बिहार में करीब 1140 सरकारी स्कूल बंद होने के कग़ार पर हैं. इसका कारण है कि इन स्कूलों के विद्यार्थियों के माता-पिता प्राइवेट स्कूलों की ओर रूख कर रहे हैं. सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में कमी और आधारभूत संरचनाओं की बदतर स्थिति इसकी वज़ह बताई जाती है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के 13 सरकारी स्कूलों में एक भी छात्र नहीं पढ़ रहे हैं. वही 171 स्कूलों में छात्रों की संख्या 20 से भी कम है और राज्य के कुल 1140 स्कूलों में 40 से कम छात्र पढ़ाई कर रहे हैं.

इसके अलावा बिहार के कुल 1773 स्कूलों के पास अपनी बिल्डिंग नहीं है. सरकार अब इन स्कूलों को पास के स्कूल में शिफ़्ट कर रही है. इनमें से पटना जिले के 190 स्कूलों का आपस में विलय किया गया है.

ग़ौरतलब है कि सरकारी स्कूलों में नामांकन की संख्या पिछले दो सालों में काफी कम हुई है. सरकारी स्कूलों का आंकड़ा रखने वाली यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (यू-डीआईएसई) के आधिकारिक वेबसाइट के आंकड़े के अनुसार 2016-17 में बिहार के सरकारी स्कूलों में कुल 1 करोड़ 99 लाख विद्यार्थी पढ़ाई करते थे. 2017-18 के सत्र में यह आंकड़ा कम होकर 1 करोड़ 80 लाख पर आ गया.

शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि अगर सरकारी स्कूलों में साइकिल और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाओं को हटा दिया जाए तो छात्रों की संख्या और कम हो जाएगी. उन्होंने कहा कि कई छात्र प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई करते हुए भी सुविधाओं के लिए सरकारी स्कूल में नामांकन करा लेते हैं.

बिहार राज्य शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक संजय सिंह ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून में कहा गया है कि हर एक किलोमीटर के अंदर कम से कम 40 छात्रों की
संख्या होने पर एक प्राथमिक विद्यालय अवश्य होना चाहिए. अगर छात्रों की संख्या 40 से कम होती है तो उस स्कूल को बंद किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि 40 से भी कम छात्रों के लिए 3-4 शिक्षकों को एक स्कूल में रखकर पढ़ाई कराना प्रासंगिक नहीं है.

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