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मोदी की कृषि सिंचाई योजना की खुली पोल, 99 में से 74 योजनाओं में अब तक नहीं हुआ काम

सरकार ने इन योजनाओं को मिलने वाले फंडिंग में भारी कटौती की है.

भारतीय जनता पार्टी ने 2014 लोकसभा चुनाव के मैनिफ़ेस्टो में वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद सिंचाई की योजनाओं को बढ़ाएगी, जिससे देश के किसानों को राहत मिलेगी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कई मंचों से कहा है कि उनकी सरकार 2019 तक 99 सिंचाई परियोजनाओं को पूरा कर लेगी. लेकिन इन दावों की असलियत यह है कि सरकार इन योजनाओं को पूरा करने में न केवल असफ़ल रही है, बल्कि इन योजनाओं की फंडिंग भी कम कर दी है.

द टे लीग्राफ़ में नीलेश जैन की रिपोर्ट के मुताबिक असलियत यह है कि इन परियोजनाओं में से अधिकतर पर सरकार ने निर्धारित बजट से काफ़ी कम पैसे जारी किए हैं. 99 में से 74 योजनाओं में खेतों में नहर भी नहीं बनाये गए हैं.

भारत में खेती के लायक कुल 200 मिलियन हेक्टेयर ज़मीन है. इसमें से 105 मिलियन हेक्टेयर जमीन पर खेती से जुड़ा कोई संसाधन नहीं है. कई दशकों से भारत की कई बड़े और मध्यम योजनाएं ठंडे बस्ते में चली गई हैं. हाल ही में नीति आयोग ने समग्र जल संसाधन सूचकांक जारी किया है, इसमें कहा गया है कि भारत अपने इतिहास की सबसे बड़े जल-समस्या से जूझ रहा है.

संसद में पेश कैग की एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2017 तक सिंचाई की 16 परियोजनाओं में से मात्र 5 पर ही अमल किया गया है. सरकार अभी तक मात्र 25.10 लाख हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई परियोजना लागू कर सकी है. बाकि के 11 परियोजनाओं पर अभी भी काम शुरू नहीं हो सका है. 10.48 लाख हेक्टेयर जमीन पर अभी कोई योजना शुरू नहीं हुई है. इन 5 परियोजनाओं पर सरकार अभी तक 14 हजार करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है, लेकिन इनमें से कोई भी योजना अभी तक पूरी नहीं हुई है.

इतना ही नहीं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वर्षा सिंचित क्षेत्रों को दिया जाने वाली योजना भी फंड की कमी से जूझ रही है. इधर 1996 में शुरू की गई 297 बड़ी और मध्यम योजनाओं में से 149 अधूरी योजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य था. इनमें से 99 योजनाओं को पूरा करने के लिए सरकार ने 2019 तक का लक्ष्य रखा था. इसके बाद सरकार ने 23 योजनाओं को प्राथमिकता के तौर पर चुना और इन योजनाओं को पूरा करने के लिए दिसंबर 2017 का लक्ष्य रखा. इसके बाद 31 योजनाओं को पूरा करने के लिए दिसंबर 2018 तक का समय रखा गया था. बाकी के 45 योजनाओं को पूरा करने के लिए सरकार ने दिसंबर 2019 की डेडलाइन तय की थी. लेकिन, फरवरी 2017 तक 3.65 लाख हेक्टेयर जमीन में से केवल 0.97 लाख हेक्टेयर जमीन पर यह योजना लागू की जा सकी है. यहां बता दें कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लागू होने से पहले ही कई योजनाएं लगभग पूरा होने के कगार पर पहुंच चुकी थी.

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और बाकी की योजनाओं के लिए सरकार द्वारा जारी फंड संतोषजनक नहीं रहा है. अब ऐसे में 2019 तक सिंचाई की इन योजनाओं को पूरा करना बहुत मुश्किल है.

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