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मोदी जी पहले हमारी परेशानी सुनें, उसके बाद कार्यक्रमों की मेज़बानी करें – भूमि अधिग्रहण से पीड़ित महिला ने बयां किया दर्द

किसानों ने कहा कि पहले सरदार सरोवर बांध के लिए जमीनें छीनी गई, हम अपनी जमीन का एक इंच भी निर्माण कार्य के लिए नहीं देंगे.

गुजरात के नर्मदा ज़िले के केवड़िया गांव में गुरुवार को वार्षिक डीजीपी और आईजीपी सम्मेलन की शुरुआत हुई थी. एक तरफ तीन दिवसीय इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात पहुंचे थे, वहीं दूसरी ओर केवड़िया गांव के किसानों ने भूमि अधिग्रहण के लिए मोदी सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था.

प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ अपना विरोध जताने के लिए ग्रामीणों ने केवड़िया कॉलोनी और गरुड़ेश्वर की दुकानें बंद रखीं और कई घरों पर काले झंडे और पॉलीथिन बैग लगाए थे.

जनसत्ता की ख़बर के अनुसार प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों का कहना है कि वे लोग सम्मेलन के आखिर दिन (शनिवार) तक अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे. किसानों का कहना है कि पहले सरदार सरोवर बांध के लिए उनकी ज़मीनें छीन ली गईं. और अब उन्हें डर है कि उनकी बची हुई बाकी ज़मीन को इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के नाम पर अधिग्रहित कर लिया जाए.

हालांकि प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से पहले पुलिस ने घरों की छतों से काले झंडे हटाने के आदेश दिए थे. लेकिन आदेश के बावजूद भी कई घरों के बाहर काले झंडे लगाए गए. प्रधानमंत्री मोदी के आगमन का विरोध कर रही जस्सीबेन तादवी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “हमारी आय का एकमात्र साधन हमरी खेती है. वो भी हमसे ले ली गई और हम मुआवज़े का इंतज़ार करते रह गए. प्रधानमंत्री को पहले हमारी शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए फिर इस प्रकार के कार्यक्रमों की मेज़बानी करनी चाहिए. हम प्रदर्शन इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हम उन्हें बताना चाहते हैं कि हम खुश नहीं हैं.”

ग्रामीणों ने कहा कि वह टूरिज्म प्रोजेक्ट और स्टैचू के पास इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए अपनी और जमीनें नहीं देंगे. किसान संजय तादवी ने कहा, “हमें कहीं और जमीन नहीं चाहिए. हम जहां रहते हैं अपनी जमीन वहीं चाहते हैं. वो हमारी जमीन पर भवन और अन्य निर्माण करवाना चाहते हैं. हम अपनी जमीन का एक इंच भी नहीं देंगे और हम अपनी जमीनों के बदले आर्थिक पैकेज नहीं चाहते हैं.”

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