गुजरात फिशरी घोटलाः भाजपा नेताओं की याचिका खारिज, 2 हफ्तों के भीतर कोर्ट में पेश होने का आदेश
एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की एक रिपोर्ट के आधार पर ज़िला न्यायालय ने मामले को संज्ञान में लिया था.
गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार, 21 दिसम्बर को 400 करोड़ के कथित फिशरी घोटाले के मामले में भाजपा के दो आरोपी नेताओं की याचिका को खारिज कर दिया है. राज्य मछलीपालन मंत्री पुरुषोत्तम सोलंकी और पूर्व दिलीप संघानी ने गुजरात उच्च न्यायालय में अपने ख़िलाफ़ लगे आरोपों को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी जिसे न्यायालय ने ख़ारिज कर दिया है. इसके अलावा न्यायालय ने दोनों आरोपी नेताओं को दो हफ़्तों के भीतर अदालत में पेश होने का आदेश दिया है.
इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के मुताबिक़ शिकायतकर्ता इशाक मराडिया के वकील विक्रम ठाकुर ने कहा, “उच्च न्यायालय का मानना था कि निचली अदालत ने सही तरीके से नोटिस भेजा है और प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की ज़रुरत नहीं है.”
गौरतलब है कि ज़िला न्यायालय ने आरोपियों को समन भेजते हुए कहा था कि अदालत में आरोपियों के ख़िलाफ़ प्रकरण चलाने के लिए काफी सबूत हैं. इसके बाद भाजपा के आरोपी नेताओं ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी.
ज्ञात हो कि एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की एक रिपोर्ट के आधार पर ज़िला न्यायालय ने मामले को संज्ञान में लिया था. इस रिपोर्ट में एसीबी के मुताबिक़ दोनों भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है.
एसीबी रिपोर्ट के अनुसार सोलंकी को ‘नीति को बदलने के लिए आरोपी पाया गया है’ और इसलिए उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोप में मामला दर्ज हो सकता है. गौरतलब है कि यह मामला 2008 का है जब तत्कालीन राज्य मछलीपालन मंत्री ने 58 रिजर्वायरों को नियमानुसार प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए सीधे ही मछलीपालन के कॉन्ट्रैक्ट दे दिए थे. उस समय संघानी राज्य में कृषि मंत्री थे. यह मामला तब उजागर हुआ जब बनासकांठा के एक मछलीपालन कांट्रेक्टर को राज्य के रिजर्वायर का कॉन्ट्रैक्ट देने से मन कर दिया गया जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की.