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कृषि मंत्री जी! कब तक भागेंगे आप, आंकड़े जुटाइए, फांसी से लटक रहे हैं देश के किसान

कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा है कि सरकार के पास 2016 के बाद किसानों की आत्महत्या से जुड़ा कोई आंकड़ा मौज़ूद नहीं है.

केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार का किसानों के प्रति रवैया बेहद ख़राब रहा है. किसान कर्ज़माफ़ी और न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की मांग को लेकर कई बार दिल्ली की सड़कों पर उतर चुके हैं. लेकिन, उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई है. इधर, सरकार के कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने लोकसभा में एक चौंकाने वाला बयान दिया है. कृषि मंत्री ने कहा है कि उनके पास 2016 के बाद किसानों की आत्महत्या से जुड़ा कोई आंकड़ा मौज़ूद नहीं है.

तृणमूल कांग्रेस के सांसद दिनेश त्रिवेदी द्वारा पूछे गए सवाल में राधामोहन सिंह ने कहा कि उनके पास किसानों की आत्महत्या से जुड़े कोई आंकड़े मौजूद नहीं हैं.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में 11,300 किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने आत्महत्या की थी. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में कृषि क्षेत्र में आत्महत्या का आंकड़ा 12,602 था, जिसमें 8,007 किसान और 4,595 खेती से जुड़े मजदूर शामिल थे.

संसद में कृषि मंत्री के बयान के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि मोदी सरकार किसानों को लेकर कितनी गंभीर है.

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