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संबित पात्रा के पात्रता पर सवाल: “ONGC भर्ती प्रक्रिया दोषपूर्ण, कम अंक वाले की हो गई बहाली अच्छे अंक लाकर भी छंट गए”…परीक्षार्थियों का आरोप

आरोप है कि अच्छे अंक प्राप्त उम्मीदवारों को इंटरव्यू(अंतिम चरण) के दौरान खारिज कर दिया जा रहा है.

अलग-अलग राज्यों के सरकारी भर्ती परीक्षाओं में धांधली की ख़बरों के बीच ओएनजीसी भर्ती प्रक्रिया में भी अनियमितता देखने को मिल रही है. परीक्षार्थियों का आरोप है कि ओएनजीसी की भर्ती प्रक्रिया काफ़ी भेदभावपूर्ण है. परीक्षा में कम अंक लाए छात्रों की बहाली कर दी जा रही है जबकि अच्छे अंक प्राप्त उम्मीदवारों को इंटरव्यू(अंतिम चरण) के दौरान खारिज कर दिया जा रहा है.
दरअसल, ओएनजीसी ने अगस्त में एचआर कार्यकारी जूनियर पद के लिए आवेदन आमंत्रित किया था. चयन प्रक्रिया तीन चरणों पर आधारिता थी. जिसमें- यूजीसी नेट स्कोर के 60 अंक, शैक्षणिक योग्यता के लिए 25 अंक और व्यक्तिगत साक्षात्कार के लिए 15 अंक थे. यानी कुल 100 अंको के आधार पर उम्मीदवारों की योग्यता जांची गई थी.

कारवां की रिपोर्ट के मुताबिक़ अलीगढ़ की बानो को साक्षात्कार को छोड़कर, चयन प्रक्रिया के पहले दो चरणों में 85 में से 62 अंक हासिल हुए. पीएचडी वाली एकमात्र उम्मीदवार होने के बावजूद उन्हें चुना नहीं गया. इन्टरव्यू में उन्हें इसलिए छांट दिया गया क्योंकि वो उस चरण के कटऑफ अंक को पार नहीं कर पाईं.
बानो ने नौकरी न मिलने के लिए एक भेदभावपूर्ण साक्षात्कार प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने ने कारवां को बताया कि “मेरे नंबर अच्छे थे और आवश्यक योग्यता थी. मैं अपने प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त थी लेकिन मैं आखिरी राउड में बाहर कर दी गई.”

उन्होंने कारवां को बताया कि ओएनजीसी भर्ती प्रक्रिया के इन्टरव्यू में पूछे गए सवाल काफ़ी असहज और भेदभावपूर्ण थे. बानो ने बताया कि “साक्षात्कार बोर्ड के सदस्यों में से एक ने मुझसे पूछा कि मैं तमिलनाडु या गुजरात में से कहां काम करने में ज्यादा सहज हूं. मैंने कहा कि मैं नौकरी की जगह को लेकर लचीली हूं और बताया कि मैंने दो साल तक दूसरे देश सऊदी अरब में काम किया है.” बानो ने सऊदी अरब के जाज़ान यूनिवर्सिटी में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम किया था. “लेकिन वो तो आपके लोग हैं, है न?” बानो ने कहा कि साक्षात्कारकर्ता ने उनकी मुस्लिम पहचान की ओर संकेत किया. उसने कहा, “लेकिन ये अलग होगा.” बानो अपनी प्रतिक्रिया में दृढ़ थीं: “नहीं, वो मेरे लोग नहीं हैं. मैं इस देश की हूं और मेरे लोग यहां हैं.”

केंद्र की जूनियर पद की नौकरियों के लिए साक्षात्कार बंद करने के आदेश, फिर भी की जा रही मनमानियां

जनवरी 2016 से ही सार्वजनिक सेक्टर की कंपनियों में भी जूनियर पद की नौकरियों के लिए साक्षात्कार नहीं लेने के आदेश जारी किए गए थे. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मन की बात में यह बात कर चुके हैं. लेकिन ओएनजीसी की परीक्षा में केवल इन्टरव्यू ही नहीं लिए गए बल्कि अधिकतर काबिल(पहले दो चरण में अधिक अंक प्राप्त) छात्रों को बाहर का रास्ता भी दिखा दिया गया.
आरटीआई के खुलासे के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में पहले दो चरण में कम अंक लाए उम्मीदवारों को अधिक तवज्जो दी गई.

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