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नीतीश सरकार की बढ़ी मुसीबतें- दोबारा शुरू हुआ हत्याकांड मामला, 19 जनवरी को सुनवाई

नीतीश कुमार पर आरोप है कि 1991 लोकसभा उपचुनाव के दौरान कांग्रेस को वोट देने पर मतदाता की गोली मारकर हत्या की थी.

पटना हाईकोर्ट में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ 1991 लोकसभा उपचुनाव में कथित हत्या के आरोप का फाइल फिर से खुल गया है. कोर्ट ने मुख्यमंत्री का पक्ष जानने के लिए 19 जनवरी की तारीख तय की है. हालांकि केस के दोबारा शुरू होने को लेकर परेशान नीतीश ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले को रद्द करने की अपील की

गौरतलब है कि ढीवार के अशोक सिंह ने 1991 लोकसभा उपचुनाव में नीतीश कुमार पर उनके भाई की हत्या करने और बूथ पर हथियार लाने के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया था. जिसके बाद 2009 में केस का दोबारा ट्रायल शुरू हुआ था. हालांकि जब 2009 में केस का ट्रायल शुरू हुआ. लेकिन उस समय नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके थे. जिसके बाद लगभग 8 सालों तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई.

लाइव बिहार की ख़बर के अनुसार अशोक सिंह ने आरोप लगाया था कि 1991 में लोकसभा उपचुनाव के समय मैं अपने भाई के साथ वोट देकर लौट रहा था. तभी अचानक नीतीश कुमार अपने समर्थकों के साथ हमारे पास आए और पूछा कि वोट किसे दिया. हमने कांग्रेस का नाम लिया तो नीतीश कुमार ने मेरे भाई सीताराम पर गोली चला दी. घटना के बाद अशोक सिंह ने नीतीश कुमार और साथियों दिलीप सिंह, योगेंद्र यादव, दुलारचंद यादव और बौधु यादव के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करवाई.

अब बीते शुक्रवार को पटना हाईकोर्ट ने नीतीश पर चल रहे हत्याकांड में मुख्यमंत्री का पक्ष सुनने  के अगली तारीख तय कर दी है.

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