“जीत का श्रेय मोदी-शाह लेते हैं, तो हार का ठीकरा भी उन्हीं के माथे” भाजपा नेताओं ने कहा- पार्टी की नीतियों की वजह से हुई हार
भाजपा सांसद ने दावा किया कि अति-आत्मविश्वास और प्रसन्नता ने भाजपा के ख़िलाफ़ कार्य किया है.
भाजपा के 2014 में सत्ता में आने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने विधानसभा चुनाव की हर जीत पर खुद की ही पीठ थपथपाई है. लेकिन मंगलवार को पांच राज्यों में विधानसभा के चुनावी नतीजे आने के बाद ये नेता हार की ज़िम्मेदारी नहीं लेना चाहते.
द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि मोदी और शाह की जोड़ी को कम से कम हार का जिम्मा अपना माथे लेना चाहिए. उन्होंने कहा “जिस तरह वे लोग जीत के लिए पूरा श्रेय लेते हैं, वैसे ही उन्हें हार को भी स्वीकार करना चाहिए. यदि भाजपा सोचती है कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता बरकरार है, तो वह एक बड़ी गलती कर रही है.”
पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा कि हिंदी पट्टी के राज्यों का यह परिणाम झटका 2014 में मिली सीटों के लिहाज़ से “एक अच्छा संकेत नहीं है”. उन्होंने कहा, “जब हम कांग्रेस-मुक्त भारत चिल्ला रहे थे, तो कांग्रेस इन चुनावों में और अधिक प्रासंगिक हो गई, जिससे 2019 के चुनावों में हमारे सामने कठिन लड़ाई होगी.”
केंद्रीय नेताओं ने हार के पीछे “स्थानीय सत्ता विरोधी कारकों” को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी सूत्रों का कहना है कि उनके “प्रदर्शन और लोकप्रियता” ने भाजपा को लड़ाई के फ़ासले को कम करने में मदद की है.
कुछ सूत्रों ने भाजपा की हार के लिए केंद्रीय नेताओं के हद से ज्यादा हस्तक्षेप को ज़िम्मेदार बताया है. उन्होंने कहा कि राज्य इकाई प्रमुखों को कुछ महीने पहले बदल दिया गया था और केंद्रीय नेतृत्व ने नीतियों और घोषणापत्रों पर स्थानीय प्रस्तावों को अनदेखा करते हुए अपनी रणनीतियों को थोप दिया. पार्टी के कार्यकर्ताओं कहना है कि किसानों के संकट पर कांग्रेस ने जो आरोप लगाए थे वे अमूमन सही थे.
रायपुर के सांसद रमेश बाईस ने कहा है कि भाजपा ने लगभग उन सभी विधानसभा क्षेत्रों को खो दिया जहां किसान परेशान थे.
छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कर्जमाफ़ी और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फ़सलों की खरीद का वादा किया, जिससे जनता प्रभावित हुई. कांग्रेस की जीत का कारण लोकलुभावन वायदे हैं.
पूर्व विधायक रघुनाथन शर्मा का कहना है कि यदि शिवराज सिंह चौहान ने “अगड़ी जातियों को परेशान नहीं किया होता” तो पार्टी “आसानी से जीत” जाती. शर्मा ने दावा किया कि इस कारण पार्टी ने कम से कम 15 सीटें खो दीं.
यह दावा 2019 के चुनावों के लिए एक चेतावनी के तौर पर था. यदि केंद्र सरकार जीएसटी के प्रावधानों में बदलाव कर सरल नहीं बनाया तो भाजपा को लोकसभा चुनावों में भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.