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पर्रिकर के इस्तीफ़े की मांग को लेकर आंदोलन तेज़ करने का फैसला

आरटीआई कार्यकर्ता राजन घाटे मुख्यमंत्री के इस्तीफे़ की मांग को लेकर पिछले आठ दिन से भूख हड़ताल पर हैं.

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के इस्तीफे़ की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे नागरिकों ने राज्यपाल मृदुला सिन्हा की “निष्क्रियता” के ख़िलाफ़ प्रदर्शन का फैसला किया है. आंदोलन से जुड़े एक नेता ने कहा कि वह अपने विरोध-प्रदर्शन को और तेज करेंगे. सैकड़ों लोगों ने 21 नवंबर को मार्च करते हुए पर्रिकर के आवास के पास पहुंच और उनके इस्तीफे़ की मांग की.

विपक्षी कांग्रेस, शिवसेना और राकांपा ने इस प्रदर्शन का समर्थन किया था. आंदोलन के नेता और कार्यकर्ता एरेस रॉड्रिग्स ने कहा, ‘‘बीते नौ महीने से पर्रिकर बीमार हैं. प्रशासन में ठहराव आ गया है.  ऐसी स्थिति में राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह मामले में दखल दें. लेकिन वह चुपचाप सबकुछ देख रही हैं. मंत्री जो चाहते हैं, वो कर रहे हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘कल से सिर्फ पर्रिकर ही नहीं मृदुला सिन्हा की निष्क्रियता के विरोध में भी हम प्रदर्शन करेंगे. इस तरह के हालात में वह सिर्फ मूकदर्शक बनी नहीं रह सकतीं. कुछ कार्रवाई करनी चाहिए ताकि गोवा में शासन लौटे.’’ आरटीआई कार्यकर्ता राजन घाटे मुख्यमंत्री के इस्तीफे़ की मांग को लेकर पिछले आठ दिन से भूख हड़ताल पर हैं.

रॉड्रिग्स ने कहा कि 21 नवंबर को पर्रिकर को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया था जिसकी मियाद खत्म हो चुकी है. उन्होंने कहा, ‘‘अब हमने गोवा के समूचे 12 तालुकाओं में आंदोलन शुरू करने का फै़सला किया है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम गोवावासियों को आश्वस्त कर सकते हैं कि 19 दिसंबर से पहले गोवा पर्रिकर से मुक्त हो जायेगा.’’ पर्रिकर अग्नाशय से संबंधित बीमारी से जूझ रहे हैं। इस साल करीब तीन महीने तक अमेरिका में उनका उपचार चला.

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