शक्तियों का अत्यधिक केंद्रीकरण भारत की प्रमुख समस्याओं में से एक: रघुराम राजन
राजन ने कहा है कि मौजूदा समय में भारत में राजनैतिक फ़ैसले लेने की शक्ति सिर्फ़ एक व्यक्ति के हाथों में सिमट गई है.
भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि मौजूदा समय में भारत में राजनैतिक फ़ैसले लेने की शक्ति सिर्फ़ एक व्यक्ति के हाथों में सिमट गई है. उन्होंने सत्ता के इस केंद्रीकरण को देश की प्रमुख समस्याओं में से एक बताया. इस संबंध में उन्होंने गुजरात में हाल ही में अनावरण की गई सरदार पटेल की मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ परियोजना का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए भी प्रधानमंत्री कार्यालय की मंजूरी लेने की जरूरत पड़ी.
बर्कले में शुक्रवार को कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में राजन ने कहा कि भारत की समस्या का एक हिस्सा यह है कि वहां राजनीतिक निर्णय लेने की व्यवस्था हद से ज्यादा केंद्रीकृत है. उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 143वीं वर्षगांठ पर 31 अक्टूबर को गुजरात के नर्मदा जिले में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का अनावरण किया था. विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति कही जा रही 182 मीटर की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को 2,989 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया. इसे महज 33 महीने में तैयार किया गया।
राजन ने कहा, ‘‘भारत एक केंद्र से काम नहीं कर सकता है. भारत तब काम करता है जब कई लोग मिलकर बोझ उठा रहे हों. जबकि, आज भारत में केंद्र सरकार के पास शक्तियां अत्यधिक केंद्रीकृत हैं.’’ उन्होंने कहा, इसका उदाहरण है कि बहुत सारे निर्णय के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय की सहमति लेनी होती है. जब तक प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुमति नहीं मिल जाती है, कोई निर्णय नहीं लेना चाहता. इसका अर्थ यह है कि प्रधानमंत्री यदि प्रतिदिन 18 घंटे भी काम करें, उनके पास इतना ही समय है. हालांकि, वह काफी मेहनती प्रधानमंत्री हैं.
राजन ने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए हमने सरदार पटेल की इस इतनी बड़ी मूर्ति को समय पर पूरा किया.’’ इस पर सभागार में हंसी के ठहाके और तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई दी. उन्होंने कहा, ‘‘यह दिखाता है कि जब चाह होती है तो राह भी है. लेकिन, क्या इस तरह की चाह हम अन्य चीजों के लिए भी देख सकते हैं?
शक्ति के अत्यधिक केंद्रीकरण के अलावा उन्होंने भारत में नौकरशाही की अनिच्छा को एक बड़ी समस्या बताया. सार्वजनिक क्षेत्र में पहल को लेकर अनिच्छा को भी उन्होंने बड़ी समस्या बताया. उन्होंने कहा कि जब से भारत में भ्रष्टाचार के घोटाले उजागर होने शुरू हुए, नौकरशाही ने अपने कदम पीछे खींच लिए. भोपाल में 1963 में जन्मे राजन भारतीय रिजर्व बैंक के 23वें गवर्नर रहे हैं. वह सितंबर 2013 से सितंबर 2016 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे.