महागठबंधन से ज़्यादा ज़रूरी मोदी के ख़िलाफ़ राजनितिक वर्णात्मक को सामने लाना है – सीताराम येचुरी
“पहले एकजुट होकर एक राजनितिक वर्णात्मक तैयार करें कि क्यों इस देश और इस देश की जनता के लिए इस सरकार को हटाना ज़रूरी है.”
सीपीआई (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी ने राष्ट्रीय महागठबंधन और सीटें साझा करने के बजाय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ एक राजनितिक वर्णात्मक तैयार करने की ज़रुरत पर ज़ोर दिया है.
न्यूज़सेंट्रल24×7 से अपनी बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “जो महत्वपूर्ण है वह है वर्णात्मक तैयार करना. एक राजीतिक वर्णात्मक का निर्माण करना है. इसलिए मेरी समझ से यह महागठबंधन, कौन किस सीट से लड़ेगा, आदि अप्रधान है. यह चुनावों में होगा. और यह स्थानीय निकाय चुनावों में ज़्यादा होगा. लेकिन जब आपके मन में राष्ट्रीय तस्वीर होगी और एक वर्णात्मक तैयार होगा, तो गणित बैठेगा.”
उन्होंने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा, “बात यह है कि जो तैयार करने की ज़रुरत है वह है इस सरकार के ख़िलाफ़ एक राजनितिक वर्णात्मक तैयार करने की. यही 2004 के चुनावों में भी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के ख़िलाफ़ भी किया गया था. श्री चंद्रबाबू नायडू यहां आए हैं, मैंने उन्हें और जिन भी विपक्षी नेताओं से मैंने बात की है, उन्हें कहा है कि पहले एकजुट होकर एक राजनितिक वर्णात्मक तैयार करें कि क्यों इस देश और इस देश की जनता के लिए इस सरकार को हटाना ज़रूरी है.”
अपनी बात को और विस्तार से समझाते हुए येचुरी ने कहा, “यह गठबन्धनों का सवाल नहीं है. और याद रखें कि राजनीति नंबरों का खेल नहीं है. गणित में 2 और 2 चार होते हैं. लेकिन राजनीति में 2 और 2, आप उन्हें एक साथ रख सकते हैं, वह 20 भी हो सकता है और 0 भी. राजनीति गणित से एक अलग खेल है. यहां जो वर्णात्मक आप तैयार करते हैं सब कुछ उस पर ही निर्भर करता है.”
सीपीआई (मार्क्सवादी) महासचिव ने न्यूज़सेंट्रल24×7 को बताया, “एक ख़ास बात जो मैंने चंद्रबाबू नायडू को कल बताई; और वे मेरी बात से सहमत भी हुए: याद है 1996 में हमने जो वर्णात्मक तैयार किया था? हमने चुनाव के बाद एक संयुक्त मोर्चा गठित किया था. चंद्रबाबू नायडू उस संयुक्त मोर्चे के संयोजक थे. 2004 में यूपीए चुनाव के बाद गठित हुआ था.”