गुजरात उच्च न्यायालय: मोदी-शाह के नापसंद जज के स्थानांतरण पर वकीलों का अनिश्चितकालीन हड़ताल
न्यायाधीश क़ुरैशी 2010-11 के बीच ऐसे कई प्रकरण देख रहे थे जिनमें प्रधानमंत्री और शाह लिप्त थे.
गुजरात उच्च न्यायालय वकील संघ (जीएचएए) शुक्रवार 2 नवम्बर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. उनका आरोप है कि गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अकील क़ुरैशी का मुंबई उच्च न्यायालय में स्थानांतरण करने से ‘न्यायतंत्र की स्वतंत्रता’ पर असर पड़ा है. जीएचएए ने यह भी आरोप लगाया है कि न्यायाधीश क़ुरैशी का स्थानांतरण किया गया क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को नापसंद थे. न्यायाधीश क़ुरैशी 2010-11 के बीच ऐसे कई प्रकरण देख रहे थे जिनमें प्रधानमंत्री और शाह लिप्त थे.
जीएचएए ने अपने संकल्प में कहा, “1 नवम्बर, 2018 को किये गए बैठक में विस्तृत विचार विमर्श के बाद बार को सर्वसम्मिति से गुजरात उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश को बेहतर न्याय व्ययस्था के नाम पर स्थानांतरित कर बॉम्बे उच्च न्यायालय 5वे नंबर का जज बना देने का कोई ठोस कारण नहीं मिला. बार का यह विश्वास है कि ऐसा स्थानांतरण अनुचित है और स्पष्ट रूप से इसका बेहतर न्याय व्यवस्था के साथ कोई सम्बन्ध नहीं है.”
ग़ौरतलब है कि न्यायाधीश क़ुरैशी गुजरात उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश होते और मुख्य न्यायाधीश आर सुभाष रेड्डी के 1 नवम्बर को सर्वोच्च न्यायालय में उन्नयन के बाद वे उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी होते. लेकिन 29 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने उन्हें बॉम्बे उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने की सिफारिश की जिसका मतलब था कि वे अपनी पदानुक्रमित वरिष्ठता खो देंगे. जीएचएए इस स्थानांतरण के आदेश को एक रिट याचिका के ज़रिये चुनौती देने पर विचार कर रही है.
ज्ञात हो कि केंद्रीय मंत्रालय ने न्यायाधीश कु़रैशी के स्थानांतरण की पुष्टि करते हुए एक बयान जारी किया था जिसमें कहा गया, “भारतीय मुख्य न्यायाधीश से विमर्श कर राष्ट्रपति ने न्यायाधीश अकील कु़रैशी का गुजरात उच्च न्यायालय से बॉम्बे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण कर दिया है एवं उन्हें निर्देश दिए हैं कि वे 15 नवम्बर से या उससे पूर्व बॉम्बे उच्च न्यायालय में अपना कार्यभार संभल लें.”