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उत्तरप्रदेश में अब आम हो गया है यह नारा- बीजेपी वालों को इस गांव में आना सख़्त मना है

ज़मीन को लेकर आंदोलन कर रहें किसानों पर जब लाठीचार्ज किया गया तो ग्रामीणों ने यह आक्रामक रुख़ अख़्तियार कर लिया.

मोदी सरकार द्वारा किसानों पर पुलिसिया कार्रवाई से किसान ख़ासा नाराज़ है. उत्तरप्रदेश में तो नाराज़गी का अालम यह है कि ग्रामीणों ने गांव में भाजपा वालों को नहीं आने की सख़्त चेतावनी दे रखी है. अब सूबे में ‘बीजेपी वालों को इस गांव में आना सख़्त मना है’ वाला पोस्टर लगा होना आम हो गया है. ताज़ा मामले में गौतमबुद्ध नगर ज़िले के कचैड़ा वारसाबाद गांव में भी एक ऐसा ही एंट्री बोर्ड लगाया गया है, जिसमें बीजेपी वालों को गांव में नहीं आने की सख़्त हिदायत दी गई है.
ग़ौर करने वाली बात यह है कि इस गांव को केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने ग्राम आदर्श योजना के तहत गोद ले रखा है.

आख़िर क्यों नाराज़ हैं ग्रामीण?

भाजपा शासित राज्यों में किसानों के आंदोलन को बहुत ही बर्बरतापूर्ण ढंग से दबाया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा के द्वारा गोद लिए गांव की भी यही स्थिति है. जनचौक के अनुसार ज़मीन को लेकर आंदोलन कर रहें किसानों पर जब लाठीचार्ज किया गया तो ग्रामीणों ने यह आक्रामक रुख़ अख़्तियार कर लिया. गांव वालों का आरोप है कि हाई सिटी बिल्डर उनके ज़मीनों पर क़ब्ज़ा जमा रहे हैं. जब किसानों ने इनका विरोध किया तो किसानों की हितैषी बताने वाली सरकार ने उनपर लाठियां बरसा दी. काफ़ी संख्या में किसानों को जेल भेज दिया.

बिल्डर नहीं कर रहा समझौते का पालन

गौरतलब है कि 2013 में ही एक बिल्डर ने ग्रामीणों से समझौता किया था. लिखित समझौते के अनुसार किसानों को 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट, गांव का विकास और भूमिहीन लोगों को 70-70 गज का प्लॉट देने का सहमति बनी थी. इसमें प्रशासन के लोग भी शामिल थे. अब ग्रामीणों का कहना है कि बिल्डर अब इस समझौते का लागू करने में आनाकानी कर रहा है. इतना ही नहीं अब समझौते को लागू करने बजाय वो जबरन ज़मीन पर क़ब्ज़ा भी जमा रहा है. जनचौक के अनुसार कचेड़ा गांव के भूमेश का कहना है कि प्रशासन बिल्डर के इशारे पर भी किसानों पर लाठीचार्ज कर रहा.

बीजेपी वालों को इस गांव में आना सख़्त मना है 

किसान विरोधी नीतियों के वज़ह से कई गांव के लोग भाजपा से रूठे हुए हैं. कई गांव ने तो अपने स्थानीय भाजपा विधायकों व सांसदों के प्रति आक्रामक रवैया ही अपना लिया है. इधर उत्तरप्रदेश के कई गांवों में ग्रामीणों ने “बीजेपी वालों को इस गांव में आना सख़्त मना है” वाला बोर्ड टांग रखा है. कुछ दिन पहले ही अमरोहा ज़िले के एक गांव रसूलपुर माफ़ी में भी किसानों ने गांव के बाहर एक बोर्ड तानकर भाजपा को चेतावनी जारी की थी. अब इसप्रकार का विरोध का तरीका नया नहीं, इसने सरकार के रवैया को देखते हुए पांव पसारना शुरू कर दिया है.

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