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प्रधानमंत्री आशा योजना का हाल हुआ ख़स्ता, पहले 3 हफ़्तों में ही किसानों को हुआ 1,149 करोड़ रुपए का नुकसान

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यह योजना किसानों के आय को दुगुना करने की तरफ़ एक क़दम है।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) की एक गणना के अनुसार इस कृषि मौसम के पहले तीन हफ़्तों में ही किसानों को प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम – आशा) योजना की वजह से 1,149 करोड़ रुपयों का नुकसान झेलना पड़ा है। इस योजना का काम न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की बिक्री सुनिश्चित करना था।

काफी चकाचौंध के बीच आए प्रधानमंत्री-आशा योजना के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यह किसानों के आय को दुगुना करने की तरफ एक क़दम है।

लेकिन, मंडियों में अनाज और दलहन को न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम दामों में बेचा जा रहा है।  द हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार कृषि मंत्रालय के अधिकारी यह मानते हैं कि इस योजना से किसानों के आय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस योजना को सितम्बर 12, 2018 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में हरी झंडी मिली थी।

एआईकेएससीसी के सदस्य एवं स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने कहा, “जब बाज़ार मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से 15% से भी अधिक कम है, तो कोई भी व्यापारी क्यों इसमें फंसना चाहेगा? वो लोग बेवकूफ नहीं हैं।” एआईकेएससीसी ने कहा है कि मूंग, तूर और उड़द के दाल उत्पादन मूल्य से थोड़ा ज़्यादा दाम में ही बिक रहे हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य और वास्तविक मूल्य जिस पर फसल बिक रही है, के अंतर को निकालकर अक्टूबर के पहले 24 दिनों में मंडियों में पहुंचे फसल की मात्रा के साथ गुणा कर 1,149 करोड़ रुपयों के नुक्सान का पता लगाया गया है।

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