#Metoo: पत्रकारों की फैक्ट्री आईआईएमसी तक पहुंची यौन शोषण की चिंगारी
संस्थान में ट्रेनिंग ले रहीं भारतीय सूचना सेवा की एक महिला अधिकारी ने विकास पत्रकारिता के एक विदेशी छात्र पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
देश की मीडिया के कई हस्तियों की सच्चाई उजागर करने के बाद मीटू अभियान ने पत्रकारिता के प्रशिक्षण के लिए प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान में दस्तक दे दी है।
भारतीय जनसंचार संस्थान में नौ महीने का प्रशिक्षण ले रही भारतीय सूचना सेवा की एक प्रशिक्षु अधिकारी ने कहा है कि संस्थान के विकास पत्रकारिता कोर्स में पढ़ने वाले एक विदेशी छात्र ने उनका यौन शोषण किया है। पीड़िता 2017 बैच की आईआईएस अधिकारी हैं और फिलहाल आईआईएमसी में प्रशिक्षण ले रही हैं। संस्थान के आंतरिक शिकायत कमेटी में इसकी शिकायत दर्ज कराई गई है।
द प्रिंट के मुताबिक संस्थान के महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश ने कहा है कि उक्त विदेशी छात्र के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है, उसे संस्थान और छात्रावास से बाहर कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, ‘उक्त विदेशी छात्र ने माफ़ी मांगी है, लेकिन संस्थान की आंतरिक जांच कमेटी इस मामले की जांच कर रही है। हम कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, भारत सरकार के सूचना- प्रसारण मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को सूचित कर दिया गया है। भारतीय जनसंचार संस्थान ने अब तक 128 देशों के करीब 1600 विदेशी छात्रों को प्रशिक्षण दिया है, लेकिन इससे पहले संस्थान में इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई।’
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन आने वाला भारतीय जनसंचार संस्थान एक स्वायत संस्था है, इसकी फंडिंग भारत सरकार द्वारा की जाती है। संस्थान के विकास पत्रकारिता कोर्स में अफ्रीका और दक्षिण एशिया के विकासशील देशों के पत्रकारों को प्रशिक्षण दिया जाता है। यह कोर्स चार महीने का है और हर साल विकास पत्रकारिता का दो बैच यहां से पास होकर निकलता है।
गौरतलब है कि संस्थान में विकास पत्रकारिता के विदेशी छात्रों और भारतीय सूचना सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए एक ही छात्रावास है।
आईआईएमसी के एक अधिकारी के मुताबिक ‘यह मामला एक विदेशी छात्र से जुड़ा है, इसलिए इसकी अपनी अलग चुनौतियां हैं। आरोपी छात्र के देश के नाम का खुलासा नहीं किया जा सकता है, क्योंकि ऐसा करने से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है।’
कहा जा रहा है कि इससे पहले भी संस्थान के मेस में विदेशी छात्रों द्वारा ऐसी हरकतें की जाती रही हैं, लेकिन कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।
भारतीय सूचना सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि संस्थान में छात्रावास का निर्माण मूल रूप से सूचना सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों के रहने के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में इसमें विदेशी छात्रों को भी रखा जाने लगा।
उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय को आईआईएमसी में ट्रेनिंग ले रहे विदेशी छात्रों के रहने के लिए अधिकारी छात्रावास की बजाय वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।