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असम: एनआरसी में नाम न होने के कारण सेवानिवृत्त शिक्षक ने फांसी लगाकर दी जान

स्थानीय एनआरसी केंद्र ने दो महीने पहले निरोद कुमार को बताया था कि उनका नाम अभी तक सूची में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि उन्हें एक विदेशी नागरिक के रूप में चिन्हित किया गया है।

असम के मंगलदोई ज़िले में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की अपडेटेड सूची में नाम न होने के कारण एक सेवानिवृत्त शिक्षक ने आत्महत्या कर ली। 74 वर्षीय निरोद कुमार दास ने रविवार सुबह की सैर से लौटने के बाद अपने कमरे में फांसी लगा ली।
ग़ौरतलब है कि एनआरसी प्रकाशित होने के बाद आत्महत्या की यह तीसरी घटना सामने आई है। इससे पहले 11 सितंबर को गुवाहाटी के 37 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी मां का नाम डी-वोटर सूची में न होने के कारण फांसी लगा ली थी। वहीं 14 अक्टूबर को तांगल में 59 वर्षीय अध्यापक ने भी सूची में नाम न होने के चलते मौत को गले लगा लिया था।
द वायर की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस अधीक्षक श्रीजीत टी ने बताया कि दास ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि वह एनआरसी प्रक्रिया के बाद विदेशी के तौर पर पहचान के अपमान से बचने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। परिवार के मुताबिक आत्महत्या के लिए दास ने किसी को जिम्मेदार नहीं बताया है। दास की पत्नी, तीन बेटियों और दामादों के साथ बच्चों व अन्य रिश्तेदारों का नाम एनआरसी सूची में शामिल था। केवल दास का नाम ही सूची में नहीं था।
दास के परिजनों ने कहा है कि स्थानीय एनआरसी केंद्र ने दो महीने पहले एक दस्तावेज़ देकर बताया कि उनका नाम अभी तक सूची में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि उन्हें एक विदेशी के रूप में चिन्हित किया गया है। हाल ही में दास को फॉरेन ट्रिब्यूनल (विदेशी नागरिक प्राधिकरण) का नोटिस भी मिला था, जिसके बाद से वे परेशान चल रहे थे।
परिवार और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि दास का नाम विदेशी सूची में डालने के लिए एनआरसी केंद्र के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए। ज़िला उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने आश्वासन दिया है कि इस बात की जांच की जाएगी कि एनआरसी सूची में दास का नाम क्यों शामिल नहीं किया गया था।
सोमवार को एनआरसी सूची में दास का नाम न होने के विरोध में बंगाली छात्र संघ ने खरुपेटिया में एक दिन का बंद बुलाया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बंद के दौरान बाज़ार, दुकानें, निजी कार्यालय और बैंक इत्यादि बंद रहे। ज्ञात हो कि, 30 जुलाई को असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की आखिरी सूची जारी की गई थी। जिसमें 2.89 करोड़ लोगों का नाम शामिल था। वहीं 40,07,707 लोगों का नाम इस सूची में नहीं है।
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