मोहन भागवत ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का किया अपमान, कहा- कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर के फ़ैसले से पहले करोड़ों लोगों की आस्था का विचार नहीं किया
केरल के सबरीमला मंदिर में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने 800 सालों के बाद मंदिर के भीतर महिलाओं के प्रवेश की इजाजत दे दी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अपमान किया है। नागपुर में विजयादशमी समारोह में भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि सबरीमला मुद्दे पर फ़ैसला देने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने समाज द्वारा वर्षों से पालन किए जा रहे नियमों पर ध्यान नहीं दिया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मोहन भागवत ने दावा किया कि ” इस फ़ैसले में धर्म के करोड़ों अनुयायियों के विश्वासों का ध्यान नहीं रखा गया है।”
ग़ौरतलब है कि केरल के सबरीमला मंदिर में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने 800 सालों के बाद मंदिर के भीतर महिलाओं के प्रवेश की इजाजत दे दी।
हालांकि, मंदिर के बाहर हिंसक विरोध प्रदर्शन करने वाले दक्षिणपंथी ताकतों ने मंदिर में प्रवेश करने के लिए 10-50 आयु वर्ग की किसी भी महिला को अनुमति नहीं दी है। पत्रकारों सहित महिलाओं पर हमला करते हुए भागवत ने कहा कि “शहरी माओवाद (अर्बन नक्सल)” देश में घृणा फैला रहा है। उनके मुताबिक आरएसएस को छोड़कर बाकी लोग राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में व्यस्त हैं।