ठांय-ठांय की आवाज़ निकालने वाले पुलिसकर्मी को मिल रही शाबाशी, इनाम देने की तैयारी में यूपी पुलिस
संभल जिले के पुलिस अधीक्षक का कहना है कि ऐसी आवाज़ें निकालना पुलिस की रणनीति का हिस्सा थी।
हाल ही में सोशल मीडिया पर उत्तरप्रदेश पुलिस का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें अपराधियों का एनकाउंटर करने गए यूपी पुलिस के जवानों के बंदूक से गोली की बजाय मुंह से ठांय ठांय की आवाज़ निकालते देखा गया। जहां पूरा सोशल मीडिया इसके लिए योगी सरकार की खिंचाई कर रहा है वहीं संभल जिले के एसपी यमुना प्रसाद ने इसके लिए पुलिसकर्मियों की सराहना की है।
ज़िले के एसपी यमुना प्रसाद ने सब इंस्पेक्टर मनोज कुमार को उनकी तीक्ष्ण बुद्धि के लिए बहादुरी प्रमाण पत्र पेश करने की बात कही है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार जिले के एसपी का कहना है कि यह गतिविधि हमारी रणनीति का हिस्सा थी। उन्होंने कहा कि कुछ मुठभेड़ों में हम अपराधी को कमजोर करने के लिए मारो-मारो और पकड़ो-पकड़ो चिल्लाते हैं, जिससे उन्हें लगे कि वह घिरे हुए हैं और आत्मसमर्पण करे। लेकिन, इन सभी चीजों को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और एसआई को खलनायक के रूप में दिखाया गया।
एसपी ने कहा कि मैंने मुठभेड़ पर एक विस्तृत रिपोर्ट बनाई है। इसके अलावा अधिकारियों से भी बात की है, जिसमें बताया गया है कि मुठभेड़ लंबे समय तक चला था। मैं पांच सदस्यीय पुलिस टीम को प्रमाण पत्र दूंगा और डीजीपी से उनकी प्रशंसा की सिफ़ारिश करूंगा। उन्होंने बताया कि पुलिस को काफ़ी पहले से ही रुखशाद उर्फ भटजा नामक अपराधी की तलाश थी। इसके ख़िलाफ़ लगभग 18 मामले दर्ज थे और राज्य सरकार ने उसे पकड़ने पर 25,000 रुपए का ईनाम भी रखा था।
पुलिस अधीक्षक ने कहा ‘हमें जानकारी मिली थी कि उक्त अपराधी असमोली पुलिस स्टेशन क्षेत्र में छिपा है। इसके बाद हमने उसे घेर लिया। इस मुठभेड़ में हमारे एक कॉन्स्टेबल को चोट लग गई और अन्य आरोपी भी घायल हो गया। उनके दो सहयोगी जंगल क्षेत्र में छिपे थे। इसी कारण से एक दल को उस क्षेत्र में भेजा गया था।’
उन्होंने कहा कि इस मुठभेड़ के दौरान एसआई मनोज कुमार का हथियार जाम हो गया। उन्होंने हथियार ठीक करने की कोशिश की लेकिन, कोई फ़ायदा नहीं हुआ। इसलिए उपाय के तौर पर उन्होंने ऐसी आवाजें निकाली।