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सबरीमाला प्रदर्शनकारियों पर केरल पुलिस का क्रूरतापूर्ण हमला दिखलाते हुए पुरानी, असंबंधित तस्वीरें फैलाई

Alt न्यूज़ की पड़ताल

केरल के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने की इजाजत देने के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में 7 अक्टूबर को, हजारों लोगों ने रैली निकाली। सोशल मीडिया पर इस घटना का, इस दावे के साथ राजनीतिकरण किया गया कि केरल पुलिस ने इन प्रदर्शनकारियों पर निर्लज्जतापूर्वक भारी बल प्रयोग किया था।

पत्रकार मीना दास नारायण ने उपर्युक्त ट्वीट में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को निशाना बनाकर उनसे पूछा कि सर्वोच्च न्यायालय के सबरीमाला फैसले का विरोध करने वाली महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों से उन्होंने कैसा व्यवहार किया है। नारायण ने, ट्विटर हैंडल @वोकाल्पैन (@vocalpain) के एक ट्वीट का एक स्क्रीनशॉट संलग्न किया था। यह अकाउंट अब डिलीट कर लिया गया है।

ट्विटर पर कई यूजर्स द्वारा तस्वीरों का एक सेट भी शेयर किया गया है, जो दावा करते हैं कि केरल पुलिस ने “सुप्रीम कोर्ट के #सबरीमाला फैसले के विरोध में स्वामीय अय्यपा का शांतिपूर्वक जप कर रहे हिंदुओं पर हमला किया” और महिलाओं व बच्चों को भी नहीं छोड़ा।

इन दिनों, एक पुलिस कॉन्स्टेबल द्वारा बुजुर्ग पर लाठी चलाते हुए एक और तस्वीर सोशल मीडिया में फैली है, जिसमें दावा किया गया है कि सबरीमाला फैसले के विरोध में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने इस व्यक्ति पर हमला किया था।

पुरानी, असंबंधित तस्वीरें

सोशल मीडिया में शेयर की गई ये तस्वीरें हाल के सबरीमाला विरोधों से संबंधित नहीं हैं। इन तस्वीरों को जुलाई 2018 में, क्लिक किया गया था जब केरल पुलिस ‘केएसयू सचिवालय मार्च’ के प्रदर्शनकारियों पर सख्ती से पेश आई थी। इस रैली का नेतृत्व कांग्रेस पार्टी का छात्र विभाग, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) ने किया था। इन तस्वीरों को 4 जुलाई को एनएसयूआई के आधिकारिक अकाउंट से ट्वीट किया गया था।

ऑल्ट न्यूज़ ने एक बुजुर्ग पर पुलिस द्वारा लाठी से हमले वाली इस तस्वीर के लिए गूगल रिवर्स इमेज सर्च टूल का उपयोग किया। यह तस्वीर हमें मलयालम की एक वेबसाइट में मिली, जहां यह 3 साल से अधिक पहले मार्च, 2015 में पोस्ट हुई थी। यह इस तथ्य को स्थापित करता है कि यह तस्वीर विशेषकर केरल के हालिया सबरीमाला विरोधों की नहीं है।

राजनीतिक रूप से खुद को आगे करने के लिए सोशल मीडिया में असंबद्ध तस्वीरों का उपयोग भ्रामक सूचनाओं के पैरोकारों की अनुमानित और नियमित रणनीति रही है। सबरीमाला मंदिर प्रवेश मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में प्रदर्शन की असंबद्ध तस्वीरों कर उपयोग, केरल सरकार की ‘हिंदू विरोधी’ छवि को चित्रित करने के लिए किया गया था।

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