हरियाणा के छात्र लाठियां खाने के बाद भी सरकार से भिड़े हुए हैं!
हरियाणा में छात्रसंघ चुनाव 1996 में बंद कर दिए गए थे। जिसके बाद से लगातार सभी छात्र संगठन छात्रसंघ चुनाव को बहाल करवाने के लिए सड़कों पर उतरे रहते थे। लगातार 22 साल के संघर्ष के बाद हरियाणा की सभी विश्वविदयालयों में छात्रसंघ चुनाव कराए जाने थे। लेकिन, ऐन वक़्त पर सरकार ने प्रत्यक्ष चुनाव की जगह अप्रत्यक्ष चुनाव की घोषणा कर दी। जिस कारण दोबारा सभी छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ा है।
तारीख 12 अक्टूबर, समय सुबह के नौ बजे। हरियाणा के रोहतक के महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में छात्र जमा होने लगते हैं। जैसे-जैसे छात्र जमा होते जाते हैं, वैसे-वैसे ‘वाईस चांसलर हाय-हाय, खट्टर सरकार मुर्दाबाद’ के नारे ऊंचे होने लगते हैं। आज यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव के नामांकन भरे जाने थे, लेकिन संघ परिवार की छात्र इकाई एबीवीपी को छोड़कर सभी छात्र संगठन इस छात्रसंघ चुनाव का विरोध कर रहे थे।
छात्र एकता मंच, इंडियन नेशनल स्टूडेंट आर्गेनाइजेशन ( इनसो ), नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ,स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), अंबेडकर स्टूडेंट मोर्चा और दूसरे कई छात्र संगठनों ने पहले से ही नामांकन प्रक्रिया का बहिष्कार करने का ऐलान किया था। ये सभी छात्र संगठन छात्रसंघ के अप्रत्यक्ष चुनाव कराये जाने के खिलाफ लामबंद हुए थे और सरकार से प्रत्यक्ष रूप से चुनाव कराने की मांग पर अड़े हुए थे। जबकि संघ परिवार की एबीवीपी इस चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने जा रही थी। इलेक्शन का विरोध कर रहे सभी छात्र संगठन निर्वाचन कार्यालय के बाहर नारेबाज़ी कर रहे थे और छात्रों को नामांकन भरने से रोक रहे थे।

नामांकन प्रक्रिया को असफल बनाने के बाद आंदोलित छात्र अपने आंदोलन को तेज करने के लिए जब यूनिवर्सिटी के मेन गेट पर ताला जड़ने गए तो उनका स्वागत पुलिस ने लाठियों, आंसू गैस के गोलों और तेज पानी की बौछारों से किया। एकाएक छात्र पुलिस से भिड़ गए। लेकिन, जल्दी ही किसी छात्र को गोली लगने की अफ़वाह भी फैल गई। छात्र लाठीचार्ज के बाद भी डटे रहे। लेकिन पुलिस छात्रों को बुरी तरह खदेड़ने के मूड में थी, इसलिए छात्रों को पकड़-पकड़कर धुनने लगी। कई छात्र कैंपस में छुपने के लिए भी भागे, लेकिन पुलिस ने उनका पीछा हॉस्टलों तक किया और छात्रों को बिल्डिंगों से बाहर निकाल-निकालकर पीटा। इस भीषण लाठीचार्ज में करीब 50 छात्रों को चोटें आईं।

लाठीचार्ज की चपेट में आकर भाषा विभाग के लोकेश गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए पीजीआईएमएस के इमरजेंसी वार्ड ले जाना पड़ा। कई छात्र नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। छात्र पुलिस के डंडों के आगे डटे रहे और एकजुट होकर अपने छात्र नेताओं की रिहाई की मांग करने लगे। छात्र साफ कह रहे थे, “जब तक उनके नेताओं को नहीं छोड़ा जाएगा, वो इस मैदान में जमे रहेंगे।”
छात्रों के गुस्से को देखते हुए यूनिवर्सिटी के वीसी बीएस पूनिया को उनके आगे झुकना पड़ा। वीसी के कहने पर छात्र नेताओं को छोड़ दिया गया। आंदोलन में सक्रिय छात्र एकता मंच से जुड़े जसमिन्दर टिंकू ने बताया,
“ये पहली बार नहीं है कि खट्टर सरकार ने युवाओं पर लाठियां बरसवाई हों। इससे पहले खट्टर बहुत बार हमपर लाठियां बरसवा चुके हैं। अगर आप देखें तो देश में कोई भी ऐसी यूनिवर्सिटी नहीं है जहां इन लोगों (मोदी सरकार) ने छात्रों पर लाठियां न बरसवाई हों। इस सरकार को अब ये समझ लेना चाहिए कि हम छात्र प्रत्यक्ष चुनाव करवाकर ही दम लेंगे। अप्रत्यक्ष चुनाव जैसे षड्यंत्र को विश्वविद्यालयों में दाखिल नहीं होने देंगे। हमारा संघर्ष इस निक्कमी सरकार के खिलाफ लगातार जारी है।”
अप्रत्यक्ष रुप से छात्र संघ चुनावों का विरोध हरियाणा की दूसरे विश्वविद्यालयों में भी हो रहा था। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी समेत कई जगहों पर कई छात्रों पर डंडे बरसाने से लेकर गिरफ्तारी तक होती रहीं। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में छात्रों ने जब कैथल-कुरुक्षेत्र मार्ग को जाम करने की कोशिश की, तो वहां भी पुलिस ने छात्रों पर ताबड़तोड़ लाठियां बरसाईं।

हरियाणा में छात्रसंघ चुनाव 1996 में बंद कर दिए गए थे। जिसके बाद से लगातार सभी छात्र संगठन छात्रसंघ चुनाव को बहाल करवाने के लिए सड़कों पर उतरे रहते थे। लगातार 22 साल के संघर्ष के बाद हरियाणा की सभी विश्वविदयालयों में छात्रसंघ चुनाव कराए जाने थे। लेकिन, ऐन वक़्त पर सरकार ने प्रत्यक्ष चुनाव की जगह अप्रत्यक्ष चुनाव की घोषणा कर दी। जिस कारण दोबारा सभी छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ा है।
छात्र अभी भी सरकार के खिलाफ मैदान में हैं। सरकार का वादा युवाओं को नौकरियां और अच्छी शिक्षा देने का था। मगर इन युवाओं को लाठियों और आंसू गैस के गोलों से संतोष करना पड़ रहा है।