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मोदी राज में घूसखोरी के मामले में आगे बढ़ रहा देश, पिछले एक साल में 11 प्रतिशत बढ़ा घूसखोरी का आंकड़ा

13 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्होंने सीसीटीवी कैमरा लगे हुए सरकारी कार्यालयों में घूस दी।

भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर शासन में मोदी सरकार फेल होने लगी है। हाल ही में प्रकाशित ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया एंड लोकल सर्कल्स के एक सर्वे के मुताबिक़ पिछले एक साल में देश में घूसखोरी के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। पिछले एक साल में 56 प्रतिशत नागरिकों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में घूस दी है। यह आंकड़ा पिछले साल के आंकड़ों से 11 प्रतिशत ज़्यादा है।
इस सर्वे में कुल 1 लाख 60 हजार से ज़्यादा लोगों की राय मांगी गई थी। जिसके आधार पर कहा गया है कि देश में सबसे अधिक घूस नकदी के माध्यम से ली जाती है। नकदी में घूस लेने का यह आंकड़ा 39 प्रतिशत बताया गया है। वहीं सरकारी कार्यालयों में दलालों के ज़रिये 25 प्रतिशत घूस की राशि दी गई और 1 प्रतिशत घूस अन्य माध्यमों से दी गई।
सर्वे में कहा गया है कि कुल दिए गए घूस का 25 प्रतिशत पुलिस अधिकारियों को दिया गया है। इसके बाद नगर निगम, भूमि पंजीकरण और दूसरे अधिकारियों का स्थान है।
न्यूज़18 की रिपोर्ट के मुताबिक़ सर्वे के दौरान 13 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्होंने ऐसे सरकारी कार्यालयों में घूस दी है जहां सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे। और तो और 36 प्रतिशत उत्तरदाताओं का कहना है कि घूस देना ही अपना काम करवाने का एकमात्र रास्ता था। इस साल घूस देने की ज़रुरत नहीं मानने वाले लोगों की संख्या भी 43 प्रतिशत से गिरकर 39 प्रतिशत पर पहुँच गई।
इसके अलावा कम से कम 58 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनके प्रदेशों में कोई एंटी-करप्शन हेल्पलाइन नहीं है और 33 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें ऐसे किसी हेल्पलाइन की जानकारी नहीं है।
ग़ौर करने की बात यह है कि इन सबके बीच इस साल, फरवरी में घोषित हुए करप्शन परसेप्शन इंडेक्स यानी कि भ्रष्टाचार बोध सूचक 2017 में भारत 79वें स्थान से 81वें स्थान पर पहुँच गया है।
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