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बुलेट ट्रेन परियोजना में भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ किसानों द्वारा गुजरात उच्च न्यायालय में 40 याचिकाएं दर्ज

गुजरात के किसानों ने सीधे तौर पर कहा है कि वे बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए अपनी जमीन नहीं देना चाहते हैं।

एक तरफ मोदी सरकार मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के नाम पर अपना चुनावी प्रचार करने से बाज़ नहीं आ रही है और दूसरी तरफ हज़ारों किसान इस परियोजना के घाट उतर रहे हैं। किसानों समेत कई जन संघर्ष संगठन एवं सामाजिक कार्यकर्ता लगातार इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में गुजरात उच्च न्यायालय में इस परियोजना के तहत होने वाले भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ किसानों ने 40 नई याचिकाएं दायर की हैं। द वायर की एक रिपोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी और न्यायाधीश वीएम पंचोली की खंडपीठ द्वारा इन याचिकाओं पर गुरूवार को सुनवाई की जाने की संभावना है। ज्ञात हो कि 10 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय को आदेश दिया था कि बुलेट ट्रेन परियोजना से प्रभावित किसानों के सभी मामलों में त्वरित सुनवाई करें।

याचिकाकर्ताओं के वकील आनंद याग्निक ने बताया कि इन 40 याचिकाओं के अलावा गुजरात खेदुत समाज के 150 प्रभावित गांवों से और 200 याचिकाएं दायर करने की संभावना है।

इसके अलावा प्रभावित किसानों की योजना है कि वे अपनी चिंताओं को जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के समक्ष व्यक्त करेंगे। ज्ञात हो कि इससे पूर्व सितम्बर के महीने में गुजरात के 1000 किसानों ने उच्च न्यायालय में हलफ़नामा दायर किया था। इस हलफ़नामे में किसानों ने सीधे तौर पर कहा था कि वे इस परियोजना के लिए उनके ज़मीन का अधिग्रहण नहीं चाहते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 26 के तहत उनकी ज़मीन के बाज़ार मूल्य को संशोधित किया जाए जो कि अब तक नहीं किया गया है। गौरतलब है कि याचिकाकर्ताओं ने गुजरात के भूमि अधिग्रहण संशोधन अधिनियम 2016 को भी चुनौती दी है।

किसानों ने बताया है कि इस नए कानून में राज्य सरकार को अपनी मनमानी करने का अधिकार मिल गया है। नए कानून के मुताबिक़ राज्य सरकार किसी भी परियोजना को सार्वजनिक हित के नाम पर सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन से छूट दे सकती है।

ज्ञात हो कि पिछले वर्ष सितम्बर में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ नरेन्द्र मोदी ने मिलकर इस बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास किया था। इस परियोजना के लिए गुजरात और महाराष्ट्र में करीब 1400 हेक्टेयर ज़मीन का अधिग्रहण होगा जिसमें से 1120 हेक्टेयर निजी स्वामित्व की ज़मीन है।

 

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