9-साल की बच्ची ने दिए राष्ट्रगान में नहीं खड़े होने के तर्क, कहा – ऑस्ट्रेलियाई मूल निवासियों का अपमान असहनीय
हार्पर इस राष्ट्रगान में ऑस्ट्रेलियाई मूल निवासियों के खिलाफ अपमान को लेकर अपने स्कूल में ही शांतिपूर्ण विरोध कर रही थी।
राष्ट्रगान और राष्ट्रवाद का बवाल भारत में ही नहीं बल्कि विदेश में भी देखने को मिल रहा है। ताज़ा मामले में ऑस्ट्रेलिया में एक 9 साल की बच्ची का राष्ट्रगान में खड़ा नहीं होना सियासी चर्चा का विषय बन गया है। बच्ची का ऐसा करना ऑस्ट्रेलिया के राजनेताओं को इतना चुभा कि बच्ची को स्कूल से निकाल देने का मशवरा देने से भी बाज नहीं आए। हालांकि राष्ट्रगान में खड़े नहीं होने को लेकर इस बच्ची का अपना तर्क़ है।
सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार क्वींसलैंड की रहने वाली हार्पर नीलसन का कहना है कि उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि राष्ट्रगान में देश के मूल निवासियों का अपमान किया गया है। ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्र गान का नाम ‘एडवांस ऑस्ट्रेलिया फेयर’ है जिसकी एक पंक्ति है ‘ऑस्ट्रेलियंस आल लेट अस रेजोइस, फॉर वी आर यंग एंड फ्री’ (Australians all let us rejoice, for we are young and free)। हार्पर ने कहा कि ‘एडवांस ऑस्ट्रेलिया फेयर’ का अर्थ है कि ‘श्वेत लोगों को आगे बढ़ाया जाए’ और दूसरा यह कि जब इस गान में ख़ुद को युवा कह रहे हैं तो 50000 वर्षों पूर्व रह रहे ऑस्ट्रेलियाई मूल निवासियों का अपमान कर रहे हैं। और इसलिए ही वह राष्ट्रीय गान के लिए नहीं खड़ी हुई।
गौरतलब है कि वर्त्तमान में ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी पूरी आबादी के महज़ दो फीसदी ही हैं। इनकी जीवन प्रत्याशा बहुत कम है और मृत्यु दर पूरे देश के मुकाबले दुगुना है।
नाइन न्यूज़ के साथ इस विषय में अपनी बातचीत के दौरान हार्पर ने कहा कि वो ऐसे लोगों में से नहीं है जो बड़ों के बनाये किसी भी नियम को चुपचाप मान लें सिर्फ इसलिए क्योंकि वो बड़ों द्वारा बनाये गए हैं।
गौरतलब है कि हार्पर इस राष्ट्रगान में ऑस्ट्रेलियाई मूल निवासियों के खिलाफ अपमान को लेकर अपने स्कूल में ही शांतिपूर्ण विरोध कर रही थी।
छोटे सी उम्र में भी यह बच्ची निर्भिक होकर अपना तर्क़ रख रही है। लेकिन वहां के नेताओं को यह इतना नाग़वार हो गुज़र रहा है कि बच्ची के साथ उसके माता-पिता को भी निशाना बनाने से नहीं चूक रहे और सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहे हैं।