झारखण्ड: आदिवासियों का हितैषी बताने वाले भाजपा के नेता कर रहे हैं आदिवासियों की ज़मीनों को लेकर धोखाधड़ी
भाजपा के पूर्व सांसद ने आदिवासियों की ज़मीन प्रेस खोलने के नाम पर ली और बना दिया मॉल और होटल
झारखण्ड की प्रदेश भाजपा सरकार सूबे की ज़मीन के दुरुपयोग को लेकर हमेशा हमलावर रहती है। राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी कभी कहा था कि ‘जो भी आदिवासियों की ज़मीन हड़पेगा, उसे होटवार जेल भेजेंगे। यह खेल पूरी तरह से बंद होगा।’ लेकिन प्रदेश भाजपा सरकार का यह प्रपंच तब उजागर होता है जब उनकी ही पार्टी के पूर्व सांसद आदिवासियों के ज़मीन के दुरुपयोग के मामले में फंसे नज़र आते हैं।
गौरतलब है कि भाजपा के पूर्व सांसद और वर्तमान में प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य अजय मारू ने प्रेस खोलने के उद्देश्य से आदिवासी ज़मीन खरीदी थी, लेकिन उसमें सिटी मॉल बना दिया। जबकि रजिस्ट्री डीड में यह साफ़ कहा गया है कि उक्त प्रयोजन प्रेस के लिए ज़मीन का उपयोग नहीं किए जाने पर विक्रेता को ज़मीन वापस कर दी जाएगी।
न्यूज़ विंग की एक रिपोर्ट के अनुसार अजय मारू ने रांची प्रकाशन लिमिटेड के लिए हरमू मुक्तिधाम के समीप 4 कट्ठा 8 छटांक आदिवासी ज़मीन खरीदी थी। यह ज़मीन उन्हें प्रेस लगाने के लिए मिली थी। रजिस्ट्री के दस साल बाद भी रांची प्रकाशन लिमिटेड ने प्रेस के लिए इस ज़मीन का उपयोग नहीं किया। गौरतलब है कि अब प्रकाशन भी अजय मारू के हाथों में नहीं है। वे इसे बेच चुके हैं। अब इस ज़मीन पर पूर्व सांसद सिटी मॉल और होटल का निर्माण करवा रहे हैं।
अजय मारू से इस बाबत जब सवाल किया गया तो वह कहते है, “उपायुक्त के परमिशन से ही आदिवासी ज़मीन औद्योगिक प्रयोजन के लिए खरीदी थी। इस ज़मीन का उपयोग औद्योगिक प्रयोजन के लिए ही होगा। 30 मई 2018 को ताज होटल के साथ एमओयू भी कर लिया गया है। होटल उद्योग की ही श्रेणी में आता है।”
कानून के जानकारों की मानें तो सिटी मॉल खोलना ग़लत है। डीसी की स्वीकृति में समय सीमा का जिक्र न होने के कारण भी सीएनटी एक्ट का ग़लत इस्तेमाल किया गया है।