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मध्यप्रदेश: फसल बीमा की राशि नहीं मिलने पर नाराज़ हैं किसान, किसानों को मिला कांग्रेस का साथ

हरदा ज़िले के 82 गांवों के किसानों ने बीमा वापसी प्रमाण पत्र बनाकर अपील की है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उनके द्वारा भरे प्रीमियम राशि का उपयोग चुनाव में कर लें।

बहुप्रचारित फसल बीमा योजना की शुरुआत तो किसानों को जोखिम से बचाने के उद्देश्य से की गई है। लेकिन सरकारी विभागों से लेकर बीमा कंपनियों में मौजूद अनियमितता से यह योजना किसानों के गले की फांस साबित हो रही है। आलम ये है कि योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को सड़क पर आंदोलन के लिए उतरना पड़ रहा है। कई किसानों को बीमा नहीं मिल रहा और जिन्हें मिल रहा उनके बीमा की राशि भरे गए प्रीमियम की राशि से काफ़ी कम है। मजबूरन किसान सड़क पर उतर आए हैं। राजनीतिक पार्टियां भी उनके संघर्ष में साथ दे रही हैं।

हिंद किसान की एक रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में हरदा ज़िले के किसान फसल बीमा में हो रही गड़बड़ियों को लेकर काफ़ी नराज़ हैं। ज़िले के 82 गांवों के किसानों ने बीमा वापसी प्रमाण पत्र बनाकर अपील की है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उनके द्वारा भरे प्रीमियम राशि का उपयोग चुनाव में कर लें।

किसानों का आरोप है कि उनका नुकसान प्रति एकड़ के हिसाब से 15-20 हज़ार रुपए हुआ जबकि उनको मुआवज़ा महज़ 1,500 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मिला। बीते वर्ष हरदा ज़िले में कुल 390 करोड़ का फसल बीमा कराया गया, जिसमें 126 करोड़ रुपए का प्रीमियम भरा गया। लेकिन किसानों को मात्र 104 करोड़ रुपए ही भुगतान किया गया। ज़िले में 54,000 किसानों ने फसल बीमा करवाया था लेकिन उनमें से 23,000 किसानों को राशि मिली वो भी प्रीमियम से कम।

किसानों का आरोप है कि प्रशासन और बीमा कंपनी से इस घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है। आपदा में नुकसान हुए फसलों का ठीक से सर्वेक्षण भी नहीं किया जाता। वहीं प्रशासन आंकड़ों के मकड़जाल में किसानों को फंसाने की कोशिश में लगी है।

उधर मध्यप्रदेश के उज्जैन में कांग्रेस किसानों के साथ सड़क पर उतर आई है। कांग्रेस का कहना है कि किसानों का कोई सुनने वाला नहीं है। बीमा का लाभ बहुत ही कम किसानों को मिला है। सरकार की नीति किसान विरोधी है।

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