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हरियाणा: आरटीआई के ज़रिए सूचनाएं मांगना किसान को पड़ा महंगा, विभाग ने 32,000 पेज देकर वसूले 68,000 रुपए 

किसान का आरोप, डेढ़ क्विंटल काग़ज़ के पुलिंदों में भी नहीं मिला उसके सवालों का जवाब

हरियाणा के सिरसा में आरटीआई को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक किसान ने जब मंडी की अनियमितता को लेकर सूचना मांगी तो सूचना पदाधिकारियों द्वारा 32 हज़ार पेज का जवाब थमा दिया गया। इसके एवज़ में किसान से 68 हज़ार रुपए भी वसूले गए। किसान को यह मालूम नहीं था कि उसके द्वारा पूछे गए सवालों के मिले जवाब ही उसके गले की फांस साबित होंगी।

हिंद किसान की एक रिपोर्ट के अनुसार सिरसा के किसान अनिल कसबा को जब मंडी की अनियमितता को लेकर ख़बर मिली तो उन्होंने आरटीआई की ज़रिए सच को जानना चाहा। पहले तो सरकारी विभाग ने सूचना देने में आना-कानी की। फिर जब अनिल नहीं माने तो विभाग ने यह सोचकर इतने पैसे की मांग की कि इतने पैसे देने में अनिल असक्षम साबित हो जाए। लेकिन अनिल ने कुल 68000 रुपए भर कर सूचना मांगा।

68000 रुपए में 32,000 पेज में जो जवाब आया वो दंग करने वाला था। सवाल हिंदी में किए गए तो जवाब अंग्रजी में दिए गए। अनिल का आरोप है कि उन्हें जान-बुझकर सूचनाएं अंग्रेजी में दी गई है। एक ग्रामीण किसान अब 32,000 पेज अंग्रेजी में कैसे पढ़ पाएगा। इसमें सूचनाएं भी उन बिंदूओं पर नहीं दी गई जिनको लेकर उन्होंने आरटीआई लगाई थी।

गांव के लोगों को यह उम्मीद थी कि आरटीआई से मंडी में हुए अनियमितताओं का खुलासा होगा। लेकिन सूचना पदाधिकारियों के इस कारनामे से ग्रामीण काफी गुस्से में हैं।

वहीं अधिकारी अपनी ग़लती स्वीकार करने से मना कर रहे हैं। उनका कहना है कि जितने पेज में सूचनाएं हो पाई उसी को उपलब्ध करवाया गया है।

एक तरफ सूचना के अधिकार को कमज़ोर करने के लिए बहुत से हथकंडे आज़माए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ आरटीआई एक्टिविस्ट पर हमले भी काफ़ी बढ़ गए है। और अब पदाधिकारियों के इस प्रकार के कारनामे आम व्यक्ति को सूचना के अधिकार से दूर खड़ा करते दिख रहे हैं।

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