केरल में बाढ़ के कारण अब तक 300 से अधिक लोगों की मौत और लाखों बेघर, बचाव कार्य में तेज़ी
तीनों सेनाओं के साथ कोस्टगार्ड, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के करीब एक लाख जवान बचाव कार्य में दिन-रात लगे
केरल में आई बाढ़ ने राज्य में तबाही का मंजर पेश किया है। आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। अब तक बाढ़ और भूस्खलन के कारण कुल 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। लाखों लोग राज्य से विस्थापित होने को मजबूर हो गए हैं। हज़ारों करोड़ की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। सैलाब के कारण राज्य में खेती, पर्यटन से लेकर आधारभूत संरचना तक को भारी नुकसान पहुंचा है।
रविवार से ज़्यादातर ज़िलों में बारिश से राहत मिलने पर बचाव कार्य में तेजी आ गई है। अब बाढ़ के कारण चारों तरफ फैले मलबे को हटाने का काम किया जा रहा है। हर कोई अपने-अपने तरीके से मदद पहुंचाने में लगा है। कई राज्य की सरकारें और वहां के आम लोग सहायता राशि, खाने-पीने की सामग्री और ज़रूरी दवाईयां केरल भेज रहे हैं। तीनों सेनाओं के साथ कोस्टगार्ड, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के करीब एक लाख जवान बचाव कार्य में लगे हुए हैं। इसके लिए 67 हलीकॉप्टर, 24 प्लेन और 548 मोटर बोट की सहयता ली जा रही है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार करीब 9 लाख लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया जा चुका है। वहीं इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मानें तो सेना और दूसरी एंजेसियों के ज़रिए करीब 38 हज़ार लोगों को बचाया जा चुका है। बाढ़ पीड़ितों के लिए राज्य में 5,645 शिविर बनाए गए हैं।
राज्य सरकार दूषित हवा पानी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए सतर्क है। साथ ही राज्य के जन-जीवन और आधारभूत संरचना को दुरुस्त करने की कोशिशें भी की जा रही हैं। राज्य की सड़कों के साथ तिरुवंतपुरम से एर्नाकुलम के बीच बाधित रेल सेवा को धीरे-धीरे फिर से शुरू किया जा रहा है।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने रविवार को बचाव कार्य के लिए सभी की सरहना की। उन्होंने बताया कि “अब तक तकरीबन 22,000 लोगों को बचाया जा चुका है। ये बस तीनों सेनाओं के साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के प्रयासों से ही संभव हो सका है।”