May a good source be with you.

दाभोलकर हत्याकांड में मुख्य साज़िशकर्ता तक पहुंचने के क्रम में साफ़ हो रहा हिंदुत्व का कट्टरवादी चेहरा

नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पंसारे, एमएम कलबुर्गी एवं गौरी लंकेश, सभी को विचारधारा के टकराव की वज़ह से बनाया गया निशाना

महाराष्ट्र के सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की हत्या में सीबीआइ की पड़ताल जारी है। नए नामों के साथ नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच का दायरा बढ़ रहा है। घटनाक्रम में आए अचानक परिवर्तनों पर सवाल भी उठ रहे हैं। लेकिन पुराने और नए गिरफ्तारियों के बीच एक चीज़ तय नज़र आ रही है, वो है इस हत्या के तार हिन्दुत्ववादी संगठन से जुड़े रहना, आरोपी का हिन्दुत्ववादी कार्यकर्ता होना।

दाभोलकर की हत्या को आज पांच साल पूरे हो गए हैं। इस सिलसिले में पहली गिरफ्तारी सितंबर, 2016 में हुई थी। सीबीआइ ने उस समय हिंदू जनजागृति समिति आश्रम से वीरेंद्र तावड़े को गिरफ्तार किया था। सीबीआइ ने उस समय बताया था कि सनातन संस्था के कार्यकर्ता सांरग अकोलकर और विनय पवार ने दाभोलकर को गोली मारी है। ये दोनों अब तक फ़रार चल रहे हैं। पुलिस के मुताबिक़ इन दोनों ने हत्या को अंजाम देने के लिए वीरेंद्र तावड़े की बाइक का इस्तेमाल किया था।

इस संबंध में 14 जून, 2016 को इंडियन एक्सप्रेस ने अपने रिपोर्ट में बताया कि दाभोलकर के मामले में सीबीआइ ने जिन दो आरोपियों की पहचान की है, उनकी 2009 के गोवा बलास्ट मामले में भी तलाश है। ये दोनों किसी हिंदू सनातन संस्था के सदस्य हैं।

नए गिरफ्तारी के संबंध के भी तार हिन्दुत्ववादी संगठनों से जुड़ते दिख रहे हैं। जाच एजेंसी ने नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के पांच साल पूरे होने से ठीक पहले इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। सीबीआइ को संदेह है कि गिरफ्तार सचिन प्रकाश दुंधरी दाभोलकर पर गोली चलाने वाले लोगों में से एक है।

औरंगाबाद निवासी सचिन प्रकाश अन्डुरे को महाराष्ट्र पुलिस ने शनिवार शाम को पुणे से गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी के बीच जो बैकग्राउंडर है उसे जानना ज़रूरी है।

अन्डुरे की गिरफ्तारी के पहले महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने महाराष्ट्र में हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं के हमले की योजना का पर्दाफाश किया। एटीएस का दावा है कि ये संदिग्ध राज्य के कई जगहों पर हमले की योजना बना रहे थे। बीबीसी हिंदी के अनुसार एटीएस ने अदालत को बताया कि उन्हें यह सूचना मिली थी कि कुछ अज्ञात लोग पुणे, सतारा, नालासोपारा और मुंबई में चरमपंथी गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं। इसी के मद्देनज़र एटीएस ने तफ़्तीश की और तीन लोगों पर मुक़दमा दर्ज़ किया।

गिरफ्तार किए तीनों लोगों का नाम वैभव रावत, शरद कलास्कर और सुधना गोंडलेकर है। इन लोगों के पास से 22 क्रूड बम और जिलेटिन स्टिक्स बरामद हुए थे। सब से ध्यान देनी वाली बात ये है कि इनमें से तीनों कोई न कोई हिंदुत्ववादी संगठन से जुड़े रहे हैं जिनके सदस्यों की गिरफ्तारी दाभोलकर व पंसारे हत्याकांड समेत गडकरी रंगायतन और मडगांव बम बलास्ट के मामले में हो चुकी है। कोई सनातन संस्था से जुड़ा है तो कोई शिव प्रतिष्ठान संस्था से।

गिरफ्तार शरद कलास्कर ने एटीएस की पूछताछ में दोभोलकर की हत्या में शामिल होने की बात स्वीकार की थी। इसके बाद कलास्कर को दाभोलकर हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआइ को सौंप दिया गया है। इसके आधार पर आगे की तफ़्तीश में सीबीआइ ने सचिन प्रकाश अन्डुरे और एक अन्य शख़्स को गिरफ्तार किया था। आज सोमवार को हुए कोर्ट की पेशी में इन्हें 26 अगस्त तक सीबीआइ रिमांड पर भेजने का आदेश दिया गया है। सीबीआइ आगे का पड़ताल कर रही है।

पिछले पांच सालों में सीबीआइ की जांच की रफ्तार बहुत धीमी रही है, और इस मामले में बहुत कम गिरफ्तारियां की गई है। गिरफ्तारी के घटनाक्रम के दौरान आरोपी बदलते रहे हैं। लेकिन जिस तरह मुख्य साज़िशकर्ता तक पहुंचने की कोशिशों के बीच जो हिंदू कट्टरवाद का चेहरा सामने आ रहा है वह भयावह है। अलग-अलग कट्टरवादी संस्थाओं का प्रचार अलग-अलग राज्यों में हो चुका है। पिछली घटनाएँ देखकर यह प्रतीत होता है कि इन संस्थाओं के लोग कुछ खास समुदाय और विचारधारा रखने वाले लोगों को अपने निशाने पर ले रहे हैं।

गौरतलब है कि नरेंद्र दाभोलकर के बाद मराठी लेखक गोविंद पंसारेकर्नाटक के विचारक एमएम कलबुर्गी और पत्रकार गौरी लंकेश की भी गोली मारकर हत्या की गई है। इन सबमें लगभग हत्या करने का तरीका एक ही है। इन चारों के हत्याओं के तार भी एक-दुसरे से जुड़े दिखते हैं। सभी को विचारधारा के टकराव की वज़ह से निशाना बनाया गया है।
You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+