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छत्तीसगढ़: उज्ज्वला योजना के बाद भी धुंए और लकड़ी पे मिड डे मील बनाने को मजबूर महिलाएं

सरकारी स्कूलों में चूल्हों पर बन रहा है खाना, नहीं है गैस-सिलिंडर की व्यवस्था

प्रधानमंत्री के हर दावे जुमले ही साबित हो रहे हैं। अपने हर भाषण में धुंए से परेशान महिला का ज़िक्र करना तो उन्हें आता है, मगर असलियत में शायद उन्हें ऐसा होता नहीं दिखता। रमन सरकार में छत्तीसगढ़ के कोरबा ज़िले के अधिकतर प्राथमिक स्कूलों में आज भी महिलाओं को दमघोटू धुंए के बीच मिड डे मील पकाना पड़ रहा है। जब सरकारी स्कूलों में ये हाल है तो अंदाज़ा लगाया जा सकता है की उज्ज्वला योजना कितनी सफल हुई होगी।

कोयले और लकड़ी पर ये महिलाएं रोज़ाना कई बच्चों के लिए खाना बनाती हैं, मगर इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। महिलाओं के साथ ही स्कूल में उठने वाला धुंआ बच्चों के लिए भी हानिकारक है, फिर भी उन्हें ऐसे हालातों में ही अपने दिन बिताने पड़ते हैं।

हिन्द किसान की रिपोर्ट के मुताबिक इन सवालों के जवाब में प्रशासनिक अधिकारी गोल-मोल जवाब देते नज़र आ रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी डी के कौशिक बताते हैं की अभी तक गैस की सुविधा नहीं दी गई है। प्रशासन द्वारा केवल चावल और बर्तन ही उपलब्ध कराये गए हैं।

ऐसे दमघोटू माहौल में बच्चे किस तरह से अपनी पढ़ाई मन लगा के कर पाते होंगे और महिलाओं की क्या हालत होती होगीये सोचने का विषय है।

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