मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भारत को 10.08 प्रतिशत की वृद्धि हासिल, मोदी सरकार में 7.3 प्रतिशत औसत वृद्धि
स्वतंत्रता के बाद 1988-89 में सबसे ऊंची वृद्धि दर 10.08 पर दर्ज़ की गयी थी जब राजीव गाँधी प्रधानमंत्री थे
एक अधिकारिक आंकड़े के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2006-07 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में 10.08 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की थी जो 1991 में हुए आर्थिक उदारीकरण के पश्चात अब तक सबसे ज़्यादा है।
स्वतंत्रता के बाद 1988-89 में सबसे ऊंची वृद्धि दर 10.08 पर दर्ज़ की गयी थी जब राजीव गाँधी प्रधानमंत्री थे।
राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग द्वारा गठित वास्तविक क्षेत्र सांख्यिकी समिति द्वारा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर पिछली श्रृंखला डेटा तैयार की गयी है। यह रिपोर्ट सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) की वेबसाइट पर जारी की गई है।
यह रिपोर्ट 2011-12 के मूल्यों के आधार पर पुरानी श्रृंखला (2004-05) एवं नई श्रृंखला के वृद्धि दरों की तुलना करती है।
पुरानी श्रृंखला (2004-05) के अनुसार, 2006-07 में निरंतर कीमतों पर सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) में 9.57 प्रतिशत का विस्तार था जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। नई श्रृंखला (2011-12) के अनुसार, वृद्धि संख्या बढ़कर 10.08 हो गयी।
तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव द्वारा शुरु किये गए आर्थिक उदारीकरण कार्यक्रम के बाद यह सबसे ऊंची वृद्धि दर दर्ज़ की गयी।
कांग्रेस पार्टी ने अपने एक ट्वीट में कहा, “जीडीपी पिछली श्रृंखला आंकड़े आख़िरकार आ चुके हैं। यह सिद्ध करते हैं कि यूपीए के दोनों कार्यकालों में देश का अर्थशास्त्र (10 वर्षों का औसत: 8.1%) मोदी सरकार (औसत 7.3%) से बेहतर रहा है।”
उस ट्वीट में आगे कहा, “आधुनिक भारतीय इतिहास में एकमात्र यूपीए ने ही द्विअंकीय वार्षिक वृद्धि दर का उदाहरण दिया है।”
रिपोर्ट के अनुसार बाद के वर्षों में भी जीडीपी अंकों में वृद्धि ही हुई।
राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग ने इस समिति का गठन सामयिकता में सुधार की संभावना के साथ इन आंकड़ों के संग्रहण, परितुलन एवं प्रसार की प्रक्रिया एवं व्यवस्था को मज़बूत करने के उपयुक्त उपायों की अनुशंसा के लिए किया था।
(अनुवाद-न्यूजसेंट्रल स्टाफ)