छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त, प्रशासन की लापरवाही आई सामने
हाईवे पर नज़र आ रही हैं गाड़ियों की जगह नाव
छत्तीसगढ़ में हुई एक दिन की बारिश ने ही रमन सरकार के सभी वादों की पोल खोल के रख दी है। राजधानी सहित प्रदेश के अन्य जिलों में पिछले 24 घंटे से भी ज़्यादा समय से रुक-रुक कर हो रही बारिश से आस-पास के इलाकों में जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। आगामी 24 घंटों में प्रदेश के कई स्थानों पर गरज-बरस के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने बस्तर के लिए रेड अलर्ट और प्रदेश के दूसरे हिस्सों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक सुकमा में एनएच 30 पूरी तरह से पानी में डूब चुका है। हाईवे पर नाव चलाई जा रही है। शबरी में आई बाढ़ से सैंकड़ों मकान पानी में डूब चुके हैं, कई कच्चे मकान धराशायी ही गए हैं।
वहीं दूसरी ओर कांकेर में भी बुरे हालात हैं। ज़ोरदार बारिश के चलते नए बस स्टैंड के सामने स्थित दुधावा तालाब फूटने से बस स्टैंड और कलेक्ट्रेट भवन में पानी समा गया है।
बारिश की सबसे ज़्यादा मार किसानों को पड़ी है। किसानों के खेतों और फसलों को भारी नुकसान हुआ है। सैंकड़ों एकड़ धान, केला समेत दूसरी कई फसलें बाढ़ में पूरी तरह डूब गई हैं।
गौरतलब है की ऐसी घटना कोई पहली बार नहीं घटी है। इससे पहले 2016 में आई बाढ़ में भी दुधावा तालाब फूटा था, जिसके बाद इस तालाब में पिचिंग करने की मांग की गई थी। प्रशासन की उदासीनता के चलते अब तक इस तालाब में पिचिंग का कार्य नहीं हो सका है। किसानों को लेकर सरकार चुनावों में वादे तो बहुत करती है, मगर असलियत में हालात जस के तस बने हुए है।