सूखे की कगार पर विदर्भ, किसानों के बीच ख़ुदकुशी जैसे बन रहे हैं हालात, प्रशासन की उदासीनता बरकरार
मध्यप्रदेश के चौराई में बांध बन जाने से बारिश का पानी महाराष्ट्र के तेंज जल सिंचाई परियोजना के बांध में नहीं आ पाया।
किसानों की ख़ुदकुशी की बात जैसे ही सामने आती है, महाराष्ट्र के विदर्भ का नाम सबसे पहले जुबां पर आता है। विदर्भ के किसानों के लिए प्रकृति और सरकार की उदासीनता दोहरी मार लेकर आया है। इस साल बारिश ने किसानों का साथ नहीं दिया तो सरकार ने भी सिंचाई के लिए नहरों में पानी देने से इनकार कर दिया है। आलम ये है कि अकेले नागपुर में पानी के बिना लाखों हेक्टेयर धान की फसल सूखने के कगार पर है।
हिंद किसान की एक रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश के चौराई में बांध बन जाने से बारिश का पानी महाराष्ट्र के तेंज जल सिंचाई परियोजना के बांध में नहीं आ पाया। इससे जलाशयों में भी पानी कम बच गया है। इन बांधों में जो पानी है उसे भी नागपुर शहर में जाने से रोक दिया गया है जिससे किसान काफी नाराज़ हैं।
किसानों का आरोप है कि प्रशासन इस स्थिति को लेकर बहुत उदासीन है जबकि नागपुर के कई तहसीलों में किसानों के लिए ख़ुदकुशी जैसी परिस्थिति बन गई है। वहीं बांध परियोजना के अधिकारी शहरों के लिए पानी रोकने को लेकर जलाशय में पानी कम होने की दलील दे रहे हैं।
विदर्भ में किसानों के लिए सूखे की समस्या बहुत बड़ी समस्या है। सूखे से निपटने की योजना अब तक बस कागजों तक ही सीमित है।