पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन, कल से ही नाजुक थी हालत
पिछले तीन दिनों से डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा था
लंबे समय से बीमारी से जुझ रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आज निधन हो गया है। 93 वर्षीय वाजपेयी पिछले एक महीने से एम्स में भर्ती थे। नाज़ुक हालत होने के कारण उन्हें चार दिनों से वेंटिलेटर पर रखा गया था। स्वतंत्रता दिवस के सुबह से ही अनुभवी डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर नज़र बनाए हुए थी, लेकिन किडनी संबंधी गंभीर बीमारियों के कारण वे बच नहीं पाए।
इस सूचना के कुछ समय पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अटल बिहारी वाजपेयी का हाल जानने एम्स पहुंचे थे।
Former Prime Minister & Bharat Ratna #AtalBihariVaajpayee passes away in AIIMS. He was 93. pic.twitter.com/r12aIPF5G0
— ANI (@ANI) August 16, 2018
अटल बिहारी वाजपेयी 1998 से 2004 के बीच भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यरत थे। प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करने वाले वे पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी थे। 27 मार्च 2015 को अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
अटल बिहारी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। जबकि वाजपेयी की शिक्षा-दीक्षा कानपुर में हुई थी। कानपुर में पोस्टग्रैजुएशन करने के बाद उन्होंने एलएलबी के लिए दाखिला लिया। लेकिन एलएलबी को बीच में ही छोड़कर राजनीति में सक्रिय हो गए।
वे राजनीतिज्ञ के साथ दार्शनिक कवि भी माने जाते थे। ‘मेरी इक्यावन कविताएं’ उनकी प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है।
अटल बिहारी वाजपेयी कवि के साथ एक पत्रकार भी थे। उन्होंने लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर-अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया।
अपने राजनैतिक जीवन में वे काफी विवादों से भी घिरे रहे। बाबरी मस्जिद विध्वंस से ठीक पहले उन्होंने कई भड़काऊ भाषण दिए। इस विध्वंस की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने जिन लोगों को इस विद्वांस के पीछे एक सांप्रदायिक माहौल तैयार करने एवं भड़काने का दोषी पाया उनमें से एक नाम अटल बिहारी वाजपेयी का भी था। इसके अलावा इनके प्रधानमंत्रित्व काल में ही गुजरात में सन् 2002 में दंगे हुए थे जिसमें करीब 2000 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए।
वाजपेयी ने 2005 में सक्रिय राजनीति से संन्यास लिया। 1992 में उन्हें पद्म विभूषण,1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 1994 में श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार, 1994 में ही गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार और 2005 में भारत रत्न से नवाजा गया।