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चुनावी हिसाब-किताब से डरी शिवराज सरकार किसानों के लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोट रही

नरसिंहपुर में ‘किसान शंखनाद यात्रा’ से पहले सभा करने जा रहे किसानों को पुलिस ने किया नजरबंद

शिवराज सरकार में किसानों के लगातार हो रहे आंदोलन से मध्यप्रदेश भी हड़ताल प्रदेश में बदल गया है। सरकार और प्रशासन किसान आंदोलन को दबाने की भरपूर कोशिश में लगी है। सरकार किसानों के लोकतांत्रिक अधिकारों का भी गला घोटने से पीछे नहीं हट रही है।

ताज़ा मामला मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर ज़िले का है। ज़िले में ‘किसान शंखनाद यात्रा’ से पहले सभा करने जा रहे किसानों को पुलिस ने नजरबंद कर लिया।

हिंद किसान की एक रिपोर्ट के अनुसार ज़िले के किसान तीन अगस्त को होने किसान शंखनाद यात्रा से गोटेगांव में सभा करने जा रहे थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें नहीं जाने दिया।

गौरतलब है कि तीन अगस्त को होने वाले किसान शंखनाद यात्रा में प्रवीण तोगड़िया और योगेन्द्र यादव शामिल होने वाले थे। इसी की तैयारियों को लेकर किसानों ने सभा का आयोजन किया था। नरसिंहपुर में किसान गन्ना के बकाया भुगतान और रिकवरी के आधार पर दाम तय करने जैसे मांगों को लेकर एक बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में थे। नरसिंहपुर मध्यप्रदेश के आयुष मंत्री जालम सिंह पटेल का चुनावी क्षेत्र है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन और बीजेपी के नेता किसानों के आंदोलन पर दमन करने में लगी है।

मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार लगातार हो रहे इन किसानों के आंदोलनों से डरी हुई सी लग रही है। आगामी चुनाव को लेकर शायद उसे डर सता रहा है कि किसानों का ये आंदोलन उनका चुनावी हिसाब-किताब न गड़बड़ा दे। सरकार आंदोलन को दबाने की भरपूर कोशिश में लगी है।

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