मप्र में शिक्षक बनने की राह देख रहे संविदाकर्मियों को तगड़ा झटका, जल्द होने वाली भर्ती में संविदाकर्मियों को मौका नहीं
शिवराज सरकार द्वारा संविदाकर्मियों को शिक्षक भर्ती में कोटा देना महज़ एक लॉलीपाप साबित हुआ
मध्यप्रदेश में आने वाले चुनावों को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नें सभी विभागों में खाली पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन प्रक्रियाओं को इसी महीने पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके मद्देनज़र स्कूल शिक्षा विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग को संविदाकर्मियों के लिए 20 प्रतिशत पदों के आरक्षण देने के नियम से छूट मांगने का प्रस्ताव भेजा था। सामान्य प्रशासन विभाग का कहना है की ये फैसला केबिनेट का था और इसमें छूट भी वही दे सकती है। इसके बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग केबिनेट में छूट के लिए प्रस्ताव रख सकता है।
नई दुनिया के मुताबिक स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि महिला शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों को मिला कर वैसे ही 75 प्रतिशत पद आरक्षित हैं और ऐसे में अगर 20 प्रतिशत पद संविदाकर्मियों को दे दिए जाते हैं तो महज़ 5 प्रतिशत पद ही बचेंगे। शिक्षक भर्ती के लिए डीएलएड और बीएड की अनिवार्य शर्त होने की वजह से पदों के खाली पड़े रह जाने की संभावना और भी बढ़ जाती है।संविदा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रमेश राठौर का कहना है की अभी तक सरकार का फैसला लागू ही नहीं हो पाया है। पीईबी से निकले आवेदनों में भी अभी तक संविदाकर्मियों के लिए कोई प्रावधान नहीं है।
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है की केबिनेट के फैसलों को लागू करने के लिए विभागों को भर्ती नियमों में बदलाव करना था मगर अभी तक ज़्यादातर विभागों ने अपने नियमों में बदलाव नहीं किये हैं। सभी विभागों को भर्ती नियमों में बदलाव लाने को कहा गया है।