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जेल भरो आंदोलन का दिखा व्यापक असर, किसानों ने कहा – मांगें नहीं माने जाने पर जारी रहेगा उनका आंदोलन

अखिल भारतीय किसान सभा का दावा – उनके अपील पर देश भर के 400 ज़िलों से तकरीबन 20 लाख किसान इस आंदोलन में हुए शामिल

कल गुरुवार को प्रस्तावित जेल भरो आंदोलन के तहत देश भर में जगह-जगह प्रर्दशन हुए। अलग-अलग राज्यों के कई ज़िला मुख्यालयों पर सैकड़ों की संख्या में किसानों, मज़दूरों द्वारा जेल भरो आंदोलन के तहत विरोध प्रदर्शन कर गिरफ्तारी दी गई। भाजपा सत्ता छोड़ो के नारे लगाते हुए किसानों द्वारा केंद्र सरकार की नीतियों पर ज़ोरदार हमला बोला गया।

उत्तर प्रदेश में लखनऊ, फैज़ाबाद, बलिया, लखीमपुर सहित कई ज़िलों में सैकड़ों किसानों ने गिरफ्तारियां दी, हालांकि बाद में इन्हें रिहा कर दिया गया। प्रदर्शन के दौरान किसानों को अन्य श्रम संगठनों के साथ जनसंगठनों का भी साथ मिला। योगी-मोदी भारत छोड़ों के नारे लगाए गए।

बिहार में भी जेल भरो आंदोलन का व्यापक असर देखने को मिला। पटना, गया, आरा, अररिया, सहरसा, पूर्णिया सहित कई ज़िलों में किसानों ने गिरफ्तारी दी। मांगे नहीं माने जाने पर आंदोलन जारी रखने की बात कही गई।

पूरे पूर्वोत्तर में अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में किए गए आंदोलन का व्यापक असर देखने को मिला। वहीं मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ भी इससे अछूता नहीं रहा।

हिमाचल प्रदेश के शिमला में पूर्ण कर्ज़माफ़ी और स्वामीनाथन आयोग के सिफारिशों को लागू करने जैसी मांगों को लेकर किसानों का प्रदर्शन हुआ। उतराखंड में किसानों ने इन मांगों सहित फसल खरीद गांरटी की मांग को ज़ोर-शोर से उठाया। किसानों और पुलिस के बीच तीखी झड़प भी हुई।

महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन के बावजूद भी जेल भरो आंदोलन का रंग फीका नहीं पड़ा। किसानों ने बढ़-चढ़कर गिरफ्तारियां दी। पालघर ज़िला में 21000 किसानों ने तो, नासिक में 18000  और सोलापुर से5000 किसानों ने गिरफ्तारी दी। यानि पूरे महाराष्ट्र में 45000 से ज़्यादा किसानों ने गिरफ्तारी देकर विरोध जताया।

दिल्ली में जंतर-मंतर पर अखिल भारतीय किसान सभा की अगुवाई में सैकड़ों किसानों ने ज़ोरदार प्रदर्शन किया। इसमें मज़दूर संगठन सीटू और पूर्व सैनिकों ने भी हिस्सा लिया।

पूरे देश भर में किसान आंदोलन का व्यापक असर देखने को मिला। पहली बार ऐसा हुआ कि इस किसान आंदोलन को अन्य संगठनों का काफ़ी साथ मिला और वे बढ़-चढ़कर प्रदर्शन में हिस्सा लिए।

गौरतलब है कि अखिल भारतीय किसान सभा देश भर में किसानों के लिए पूर्ण कर्ज माफ़ी, C2 फॉर्मूले के तहत एमएसपी तय करने और 60 साल से ज़्यादा उम्र के किसानों को हर महीने 5000 रुपए पेंशन देने जैसी मांगों को लेकर देशव्यापी जेल भरो आंदोलन का आह्वान किया था। हिंद किसान के अनुसार संगठन का दावा है कि उसके अपील पर देश भर के 400 जिलों से तकरीबन 20 लाख किसान इस आंदोलन में शामिल हुए।

किसान संगठन का केंद्र सरकार पर आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा जान-बूझकर खेती को अलाभकारी बनाया जा रहा है। भाजपा शासन में जहां बड़े पूंजीपतियों को लूट की छूट मिली है, वहीं किसान मज़दूरों को तबाह किया जा रहा है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार किसानों के फसलों के लागत का डेढ़ गुना दाम नहीं दिया जा रहा है।

उधर किसान को इस आंदोलन पर स्वामीनाथन का भी साथ मिला। द वायर के अनुसार भारतीय किसान सभा को लिखे एक पत्र में स्वामीनाथन ने कहा है कि राष्ट्रीय किसान आयोग (एनसीएफ) की सिफारशें को लागू करने की मांग के संदर्भ में किसानों का आंदोलन न्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि देश भर में किसान और किसान आंदोलन सिर्फ एनसीएफ की सिफारशों को लागू करने की मांग कर रहा है। यह सही समय है कि एनसीएफ की सिफारिशों को जल्द लागू किया जाए।

ज्ञात हो कि देश भर में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लेकर किसानों का आंदोलन जारी है। हालांकि किसानों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने इधर एमएसपी में ऐतिहासिक वृद्धि कर किसानों को खुश करना चाहा, लेकिन किसानों का कहना है कि निर्धारित की गई नई एमएसपी स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुकाबले कम है।

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