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फ़र्ज़ी ‘आधार’ को ही आधार बना हो रहें घोटाले, केंद्र सरकार की पारदर्शिता के दांवे झूठे

फ़र्ज़ी आधार और बैंक में खाता खोलकर उड़ा लिए जा रहे हैं लोगों के पैसे, प्रशासन फिर से उदासीनता के चपेट में

भापजा शासित राज्यों में केंद्र सरकार की योजनाओं में फ़र्ज़ीवाड़ा जारी है। इधर छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में फ़र्ज़ी मस्टर रोल बनाकर मनरेगा के तहत फ़र्ज़ीवाड़ा के कई मामले सामने आ रहे हैं। विभाग के अधिकारी और पंचायत सरपंच द्वारा करोड़ों रुपए गबन कर लिए गए। कार्रवाई के नाम पर बस जांच का आश्वासन दे दिया गया।

ताज़ा मामले में मध्यप्रदेश के छतरपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना में जमकर घपलेबाजी सामने आ रही है। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि जिस आधार कार्ड को लेकर भ्रष्टाचार कम करने का दावा केंद्र सरकार करती है उसी आधार का इस्तेमाल फ़र्ज़ीवाड़े के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा है।

ईनाडु इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार खेमराज कुशवाहा के नाम आए प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि को उसके नाम से फ़र्ज़ी आधार और बैंक अकाउंट खोलकर उड़ा लिया गया, पर उसे इस बात की कोई जानकारी ही नहीं है।

गौरतलब है कि खेमराज कुशवाहा रोजगार के सिलसिले में कई सालों से दिल्ली में रह रहा था। उसे जब पता चला कि उसका नाम आवास योजना में स्वीकृत हुआ है तो वो दिल्ली छोड़कर गांव आ गया। लेकिन गांव पहुंचते ही उसे मालूम चला कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आई राशि उसके नाम से पहले ही निकाल ली गयी है। इसके लिए उसके नाम का फ़र्ज़ी आईडी और बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया गया है।

एक तरफ पंचायत सचिव का कहना है कि ग़लती से वह राशि किसी और के खाते में चली गयी। वहीं दूसरी तरफ लोगों का इस पर कहना है कि आखिर खेमराज की फोटो ऑनलाइन पोर्टल में कैसे अपलोड हो गई। आखिर उसके नाम से कोई कैसे खाता खुलवा सकता है।

केंद्र सरकार व राज्य सरकार पारदर्शिता को लेकर कितने भी दावे कर ले पर ज़मीनी स्तर पर हो रहे लगातार घोटाले उनकी पारदर्शिता की पोल खोलते नज़र आते हैं।

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